Delhi Blast: ED ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जवाद अहमद को किया अरेस्ट, जब्त किए 48 लाख रुपये नकद
Delhi Blast: दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके से जुड़े संदिग्ध आरोपी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 18 नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल-फ़लाह विश्वविद्यालय के फाउंडर और अल-फ़लाह ग्रुप के प्रसिडेंट जवाद अहमद सिद्दीकी को अरेस्ट कर लिया है। सिद्दीकी से पूछताछ की जा रही है और उनके आवास पर तलाशी ली जा रही है।
यह गिरफ्तारी दिल्ली-एनसीआर में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के ट्रस्टियों और प्रमोटरों के ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी के बाद हुई। यह विश्वविद्यालय लाल किले के पास हुए कार बम धमाके के मामले की जांच के केंद्र में रहा है।

लाल किले के पास हुए आतंकी हमले से जुड़े है तार
गौरतलब है कि 10 नवंबर को दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की इमारत के पास हुए विस्फोट में पंद्रह लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े कई डॉक्टरों और कश्मीर में उनकी भूमिका आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसियों की निगरानी में है।
25 ठिकानों पर छापेमारी की गई
केंद्रीय जांच एजेंसी की कई टीमों ने अल-फलाह ट्रस्ट और विश्वविद्यालय प्रतिष्ठान के कम से कम 25 कैंपस पर छापेमारी की। एजेंसी के अधिकारियों ने दिल्ली के ओखला क्षेत्र में एक कार्यालय पर भी छापा मारा, जहां पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा सुरक्षा घेरा प्रदान किया गया था।
जब्त किए 48 लाख रुपये नकद
अधिकारियों ने बताया कि सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के आपराधिक प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्हें आगे की रिमांड के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। 18 नवंबर को दिल्ली में 19 स्थानों पर छापेमारी की गई, जिसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी के साथ-साथ जावेद सिद्दीकी और अन्य संबंधित व्यक्तियों के घर भी शामिल थे। इस दौरान ED ने ₹48 लाख नकद, कई डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।
डॉ. उमर नबी का कथित करीबी हुआ अरेस्ट
अधिकारियों के अनुसार, समूह से जुड़ी कम से कम नौ शेल (डमी) कंपनियां, जो सभी एक ही पते पर पंजीकृत हैं, ईडी की जांच के दायरे में हैं। एक ईडी अधिकारी ने बताया, "यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं, शेल कंपनियों के उपयोग, आवास संस्थाओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा है। एजेंसी ने मामले में एनआईए और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) का संज्ञान लिया है। अब तक, एनआईए ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें "आत्मघाती हमलावर" डॉ. उमर नबी का कथित करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।
फंड की हेराफेरी का हुआ खुलासा
अल-फलाह विश्वविद्यालय हरियाणा के फरीदाबाद जिले के धौज क्षेत्र में स्थित एक मेडिकल कॉलेज-सह-अस्पताल है। यह जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दो एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद ने NAAC से मान्यता और UGC अधिनियम की धारा 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि यूनिवर्सिटी और सभी कॉलेज इसी ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित होते हैं, जिन पर सिद्दीकी का पूर्ण नियंत्रण था। ED की पड़ताल में बड़े पैमाने पर फंड की हेराफेरी का खुलासा हुआ है। ट्रस्ट में आने वाले पैसे को परिवार की कंपनियों में स्थानांतरित किया गया।
जावेद सिद्दीकी ने निर्माण और कैटरिंग के ठेके भी अपनी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए थे। करोड़ों रुपये की "प्रोसीड्स ऑफ क्राइम" (अवैध कमाई) बनाई गई और उसे कई शेल कंपनियों के माध्यम से लेयर किया गया।












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