राफेल डील पर लोकसभा में सीतारमण का जवाब, सितंबर तक मिल जाएगा पहला विमान, 2002 तक सभी 36
राफेल डील पर लोकसभा में सीतारमण का जवाब, सौदा राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा
नई दिल्ली। शुक्रवार को लोकसभा में कांग्रेस और दूसरे विपक्ष के सदस्यों की ओर से राफेल डील पर खड़े किए गए सवालों का रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया। सीतारमण ने बताया है कि डील एकदम साफ-सथुरी है और इसी साल सितंबर में पहला राफेल विमान भारत को मिल जाएगा। वहीं 2022 तक सभी 36 विमान भारत की सेना के पास होंगे। बता दें कि विपक्ष मामले की जांच के लिए जेपीसी बनाए जाने की मांग कर रहा है लेकिन सत्तापक्ष इस पर तैयार नहीं है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि डील के बेसिक दाम हम सार्वजनिक कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष अलग-अलग जगह नए-नए दाम बताते रहे। कांग्रेस बताए कि उसे 526 करोड़ का आंकड़ा कहां से मिला। हमने तो 9 फीसदी कम दाम में राफेल विमान खरीदे हैं।
विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि सीतारमण ने कहा, रक्षा डील देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। देश की सुरक्षा से समझौता नहीं हो सकता। सीतारमण ने लोकसभा में कहा, भारत को चौतरफा खतरा है और विपक्ष इस बात को समझे। बीते सालों में हमारे पड़ोस के देशों ने लगातार अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाई लेकिन हम ऐसा नहीं कर सके, कांग्रेस की सरकारों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। ऐसे में राफेल खरीद का फैसला वायुसेना की जरूरत के हिसाब से लिया गया।
राफेल पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमें अपने पड़ोसी मुल्कों से खतरा है, ऐसे में हमें अपनी सेना को मजबूती देनी की जरूरत है। सरकार डील पर हर सवाल का जवाब देने को तैयार है लेकिन कांग्रेस को रक्षा सौदे की गोपनीयता समझनी चाहिए। एचएएल से सौदा लेकर दूसरी कंपनी को दिए जाने पर रक्षामंत्री ने कहा कि कांग्रेस घड़ियाली आंसू ना बहाए, यूपीए के वक्त भी एचएएल के साथ कोई करार साइन नहीं किया गया था।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि रक्षा सौदा और रक्षा सौदेबाजी में फर्क हैं, कांग्रेस की तो राफेल डील करने की नीयत ही नहीं थी। हमारे लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे ऊपर है इसीलिए हम तय समय से 5 महीने पहले ही सारे विमानों को भारत ला रहे हैं। डील के 3 साल के भीतर आ जाएगा जबकि कांग्रेस यह काम नहीं कर पाई। यूपीए के वक्त में 10 साल तक करार की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो पाई जबकि हमने 3 महीने में यह करके दिखाया है।
राफेल डील की प्रक्रिया के बारे में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 74 बैठकों के बाद राफेल सौदा किया गया था। हथियारों से लैस और बगैर हथियार वाले राफेल विमान की तुलना गलत है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कोर्ट ने भी राफेल डील पर सवाल नहीं उठाए। पार्टियों की ओर से कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं, ताकि वह इसका राजनीतिक फायदा ले सकें। हमने कोर्ट को गुमराह नहीं किया, कोर्ट का फैसला पूरी प्रक्रिया देखकर ही आया है। देशहित में कीमत बताना ठीक नहीं है क्योंकि यह बहुत संवेदनशील मामला है।
रक्षा मंत्री ने कहा, कांग्रेस और राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं। वह सदन के सामने बताए कि राफेल पर उनी किस से क्या बात हुई है। कांग्रेस के लोगों ने प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री से लेकर एयर चीफ के बारे में गलत बातें कहीं। कांग्रेस के नेता पाकिस्तना में जाकर मोदी को सत्ता से हटाने की मदद मांगकर आए।
यूपीए ने 18 विमानों का सौदा किया था, ये संख्या बढ़ाकर हमने 36 की है। कांग्रेस देश को गुमराह कर रही है कि हमने विमानों की संख्या घटाई है। आपात स्थिति में 36 विमान खरीदे जाते हैं। 1982 में भी 36 विमानों की खरीद की गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मिशेल के भारत आ जाने से परेशान है।
कांग्रेस ने 10 साल तक सरकार में रहते हुए कुछ नहीं किया, ना उनकी दिक्कतें जानने की कोशिश की। कांग्रेस बताए उसने अगस्ता की डील एचएएल के साथ क्यों नहीं की। हमारी सरकार ने वायुसेना के करीब एक लाख विमानों को ऑर्डर एचएएल को दिए। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि संसद में हंसी मजाक करना ठीक है लेकिन हर AA के बाद एक RV और Q भी है। उन्होंने कहा कि ये RV प्रधानमंत्री का दामाद नहीं बल्कि देश का दमाद है।
शुक्रवार को संसद के शीतकालीन सत्र का 15वां दिन हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में कहा कि राफेल मामले में सरकार कोर्ट के फैसले के आधार पर क्लीन चिट लेना चाहती है, लेकिन हमने पहले ही इसे खारिज कर दिया था कि इसपर फैसला जनता की अदालत संसद में होना है। उन्होंने कहा कि हमने जब झूठ पकड़ा तब सरकार ने इस मामले में गलती सुधारने के लिए कोर्ट में आवेदन किया है। केंद्र सरकार तो कोर्ट को भी अंग्रेजी पढ़ाना सिखा रही है। विमान की कीमत पर शक के दायरे में हैं। सरकार शुरू से ही कीमत छुपा रही है और इसके लिए करार का हवाला दे रही है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी राफेल डील पर सवाल खड़े किए हैं।












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