Rafale मामले पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- पारदर्शी हुआ सौदा,कांग्रेस का आरोप शर्मनाक
नई दिल्ली। फ्रांस से हुए राफेल लड़ाकू विमान मामले पर कांग्रेस के आरोप के बाद सरकार का जवाब आया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस के आरोप शर्मना हैं। उन्होंने कहा कि पूरी पारदर्शी प्रक्रिया के बाज इस सौदे को आखिरी रूप दिया गया था। शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान सीतारमण ने कहा कि 36 राफेल विमानों के लिए अंतिम समझौते पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की मंजूरी के बाद ही हस्ताक्षर किए गए। सीतारमण ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) 10 सालों तक राफेल विमान के प्रस्ताव पर बैठी रही।

वहीं एयर चीफ मार्शल ने बीएस धनोआ ने गुरूवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि सौदा बहुत अच्छा है। धनोओ ने कहा कि इस सौदे में को विवाद नहीं है। बीएस धनोआ ने कहा था कि, 'इसमें कोई विवाद नहीं है। मुझे नहीं पता कि इसमें क्या विवाद चल रहा है। इसकी लागत अधिक नहीं है। सरकार ने बहुत अच्छी डील के साथ समझौता किया है। मुझे लगता है कि हमने एक अच्छी डील के साथ समझौता किया है।'
कांग्रेस का आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एवियेशन के साथ राफेल लडाकू विमानों खरीदने को लेकर जो समझौता किया है उसमें ज्यादा पैसा दिए गए है। डसाल्ट एवियेशन ने भारतीय वायुसेना को 36 राफेल लड़ाकू विमान देने हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी से 58,000 करोड़ (7.8 अरब यूरो) में 36 राफेल विमान खरीदने का सौदा किया है जो टैक्स देने वाले लोगों का कमाई है। कांग्रेस का आरोप है कि वर्ष 2012 में यूपीए सरकार ने फ्रांस से एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए जितने में समझौता किया था। उससे तीन गुना ज्यादा रकम देकर मोदी सरकार एयरक्राफ्ट खरीद रही है।












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