सिंधु घाटी लिपि को कीजिये डिकोड, तमिलनाडु सरकार देगी 10 लाख अमेरिकी डॉलर, जानिए मामला
Indus Valley Civilization: सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा एक बड़ा रहस्य अभी भी अनसुलझा है, और वह है सिंधु घाटी लिपि, जिसे अब तक डिकोड नहीं किया जा सका है। अगर इस लिपि को समझ लिया जाए, तो सिंधु घाटी सभ्यता के कई रहस्यों का पर्दाफाश हो सकता है। इसी लिपि को डिकोड करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ी राशि देने की घोषणा की है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने रविवार को घोषणा की कि सिंधु घाटी लिपि के रहस्य को सुलझाने वाले व्यक्ति या संस्था को 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 7.5 करोड़ रुपये) का पुरस्कार दिया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने सिंधु सभ्यता की खोज के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान की।

दुनिया भर के विद्वान कर रहे हैं प्रयास
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, "हम अब भी सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि को स्पष्ट रूप से समझने में असमर्थ हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस लिपि को समझने के लिए दुनिया भर के विद्वान और शोधकर्ता लगातार प्रयास कर रहे हैं और राज्य सरकार इस प्रयास को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय लिया है।
सिंधु घाटी सभ्यता, जो दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, अपनी उन्नत शहरी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी लिपि अब तक डिकोड नहीं हो पाई है।
सिंधु लिपि क्या है?
सिंधु लिपि, जिसे हड़प्पा लिपि और सिंधु घाटी लिपि के नाम से भी जाना जाता है, सिंधु घाटी सभ्यता द्वारा निर्मित प्रतीकों का एक संग्रह है। इन प्रतीकों वाले शिलालेख बहुत छोटे होते हैं और इनमें से किसी की भी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। कई प्रयासों के बावजूद, इस लिपि को अब तक समझा नहीं जा सका है।
यह लिपि समझने के लिए कोई ज्ञात द्विभाषी शिलालेख भी नहीं है, जो समय के साथ कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाता हो। इस पुरस्कार की घोषणा से उम्मीद जताई जा रही है कि इस रहस्यमयी लिपि को समझने की दिशा में एक नया कदम उठाया जाएगा।
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