आईपीएस अफसरों की बढ़ती मांग, घटती तादाद, सरकार का सिरदर्द
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) देश में भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस अधिकारियों की कमी है। इससे सरकार परेशान है। उसकी तरफ से इस कमी को दूर करने की जोरदार कोशिशें हो रही हैं। जानकारी के मुताबिक, चूंकि अब राज्यों की संख्या बढ़ रही है तथा सरकारी विभाग भी बढ़ते जा रहे है, इसके चलते आईपीएस अफसरों की मांग पहले से ज्यादा हो गई है।
बनते नए राज्य
हाल के सालों में उत्तराखंड, तेलंगाना, झारखंड, छतीसगढ़ जैसे राज्य देश के मानचित्र पर उभरे। सरकार ने इस बात को माना है। तो अब सरकार क्या कर रही ताकि इस कमी को दूर किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने "सीमित प्रतिस्पर्धा परीक्षा" को आईपीएस की भर्ती के तीसरे माध्यम के रूप में प्रारंभ किया है।
भाग लेने के पात्र
निश्चित पात्रता मापदंड पूरा करने वाले राज्य पुलिस सेवा के पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी, केन्द्रीय अर्धसैनिक बल के सहायक कमांडेंट और रक्षा बलों के कैप्टन और मेजर इस परीक्षा में भाग लेने के पात्र हैं।
80 उम्मीदवार
भर्ती के इस माध्यम के जरिए सालाना 80 उम्मीदवार भर्ती किए जाते हैं। इसके अलावा, राज्य पुलिस सेवा से पदोन्न्ति के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी ने लोकसभा में दी।
हालांकि भर्ती के इस माध्यम को चुनौती देने वाले अदालती मुकदमें मंत्रालय, यूपीएससी, डीओपी एंड टी और रक्षा मंत्रालय को बड़ी तादाद में प्राप्त हुए हैं और वर्तमान में ये विचाराधीन हैं।













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