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इंडियन आर्मी में मुस्लिम रेजीमेंट क्यों नहीं है? जानिए पूरा सच

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बहस चल रही है कि भारत में मुस्लिम रेजीमेंट क्यों नहीं है। इस सवाल का जवाब वॉट्सएप्प, फेसबुक और यहां तक की वीडियो के माध्यम से यूट्यूब पर भी लोग इसका जवाब दे रहे हैं, जिसमें ज्यादातर झूठ, अफवाह और गुमराह करने की कोशिश की गई है। कई लोग इसे पाकिस्तान के 1965 के युद्ध से जोड़ते हुए कह रहे हैं कि उस वक्त मुसलमानों ने इंडियन आर्मी के साथ गद्दारी की थी और तभी से इस रेजीमेंट को खत्म कर दिया गया। लेकिन सच्च तो यह है कि इंडियन आर्मी में मुस्लिम रेजीमेंट तो थी लेकिन उसे पंजाब मुस्लिम (PM) रेजीमेंट के नाम से जाना जाता था और यह एक नहीं बल्कि कई थी।

इंडियन आर्मी में मुस्लिम रेजीमेंट क्यों नहीं?

इंडियन आर्मी में मुस्लिम रेजीमेंट क्यों नहीं?

दरअसल, इंडियन आर्मी में जितनी भी रेजीमेंट बनी है वो ब्रिटिश राज के दौरान ही बनी है। यानि अंग्रेजों ने जाति और क्षेत्र के आधार पर इंडियन आर्मी में रेजिमेंट्स को बनाया है। इंडियन आर्मी में धर्म के नाम पर सिर्फ एकमात्र सिख रेजिमेंट है, इसे छोड़कर ना तो हिंदू रेजिमेंट है और ना ही क्रिश्चियन रेजिमेंट। इंडियन आर्मी में मद्रास रेजीमेंट, राजपूत रेजीमेंट, डोगरा रेजीमेंट, जाट रेजीमेंट, असम रेजीमेंट, महार रेजीमेंट, बिहार रेजीमेंट और नागा रेजीमेंट से लेकर तमाम रायफल्स ब्रिटिश काल में बनी थी। इसलिए मुस्लिम रेजीमेंट का भारत में कोई इतिहास नहीं है।

इंडियन आर्मी में 3 प्रतिशत मुसलमान

इंडियन आर्मी में 3 प्रतिशत मुसलमान

बंटवारे से पहले भारत में 23 प्रतिशत मुसलमान थे और उस वक्त 2 प्रतिशत इस धर्म के जवान इंडियन आर्मी का हिस्सा थे। बंटवारे के बाद 1951 में इंडियन आर्मी में 2 प्रतिशत मुस्लिम जवान थे, लेकिन 1990 में घटकर 1 प्रतिशत हो गए। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में करीब 14 प्रतिशत मुस्लमान हैं और आज 3 प्रतिशत मुस्लिम इंडियन आर्मी का हिस्सा हैं।

 पाकिस्तान के साथ 1965 की सच्चाई और इंडियन आर्मी में मुस्लिम

पाकिस्तान के साथ 1965 की सच्चाई और इंडियन आर्मी में मुस्लिम

अफवाह ये फैलाई जा रही है कि 1965 के युद्ध में मुस्लिम रेजीमेंट ने इंडियन आर्मी को धोखा दिया था और पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ने के मना कर दिया था, लेकिन इस बात में 0.1 प्रतिशत की भी सच्चाई नहीं है। 1965 के युद्ध का हिस्सा रहे रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह के मुताबिक, पाकिस्तान के खिलाफ के इस युद्ध में मुसलमान भी लड़े थे। यहां तक कि 1965 के इस युद्ध में बहादुर सैनिक अब्दुल हामिद को उनकी वीरता और शौर्य के लिए परमवीर चक्र से नवाजा गया था। इस युद्ध में जवान हामिद ने पाकिस्तान के चार टैंक ध्वस्त किए थे।

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