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कोरोना के चक्कर में इन बीमारियों में ज्यादा हो सकती है मौत

नई दिल्ली- कोरोना वायरस ऐसी बीमारी है जो अकेले कहर लेकर नहीं आई है। आने वाले दिनों में इसकी वजह से दूसरी बीमारियों के भी भयावह शक्ल अख्तियार करने की आशंका है। हाल में कई तरह के शोध हुए हैं, जिसमें यह बात सामने आई है कोरोना क्राइसिस में दूसरी जानलेवा बीमारियों की रोकथाम का काम रुक सा गया है, जिसके चलते आने वाले वर्षों में वो नियंत्रित हो चुकीं बीमारियां एक बार फिर खूनी खेल दिखा सकती हैं। मसलन, मलेरिया, टीबी और एड्स जैसी बीमारियों से मौत का ग्राफ एकबार फिर से भयानक रूप से ऊपर चढ़ सकता है।

मलेरिया, टीबी और एड्स से ज्याद मौतें हो सकती हैं

मलेरिया, टीबी और एड्स से ज्याद मौतें हो सकती हैं

कुछ नए शोध में पाया गया है कि भारत जैसे देशों में जिस तरह से पूरी स्वास्थ्य सेवा को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए झोंक दिया गया है, उससे ऐसे देशों में टीबी, मलेरिया और एड्स से होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत ही ज्यादा बढ़ सकता है। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे-जैसे लॉकडाउन में ढील मिल रही है, स्वास्थ्य सेवाओं को इन बीमारियों की ओर भी ध्यान देते रहना चाहिए, ताकि इसमें अबतक जो कामयाबी हासिल हुई है, वह बेकार न चली जाय। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्वी एशिया की रीजनरल डायरेक्टर पूनम क्षेत्रपाल सिंह का कहना है, 'जैसे हम कोविड-19 से जंग लड़ रहे हैं, हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं लगातार काम करते रहें।' उन्होंने कहा है, 'पहले की महामारियों में देखा गया है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत ज्यादा दबाव होता है, वैक्सीन से रुकने वाली और दूसरी इलाज लायक बीमारियों में मृत्यु दर नाटकीय ढंग से बढ़ जाता है।'

भारत में टीबी से 40 हजार अतिरिक्त मौत की आशंका

भारत में टीबी से 40 हजार अतिरिक्त मौत की आशंका

इस अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में सिर्फ एक महीने की लॉकडाउन की वजह से 2020 से 2025 के बीच केवल टीबी से 40,685 अतिरक्त लोगों की मौत हो सकती है। यानि लॉकडाउन जितने महीने रहेगा, मृत्यु का यह आंकड़ा उसी हिसाब से बढ़ेगा। मतलब कि लॉकडाउन की वजह से दूसरी गंभीर बीमारियों पर स्वास्थ्य सेवाओं में लगे लोगों का ध्यान हट सा गया है और पूरा फोकस नोवल कोरोना वायरस पर है। भारत की आबादी के मद्देनजर इन वजहों से सबसे ज्यादा मार यहीं पड़ने वाली है। इसके बाद केन्या का नंबर है, जहां 1,157 अतिरिक्त लोगों की मौत हो सकती है और फिर यूक्रेन की बारी है, जहां 137 अतिरिक्त लोग इन बीमारियों के चलते दम तोड़ सकते हैं। गणितीय मॉडलिंग के आधार पर यह स्टडी इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरक्यूलोसिस एंड लंग डिजीज ने इंपीरियल कॉलेज और एवेनिर हेल्थ एंड जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने मिलकर किया है और अमेरिका की एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट ने भी उन्हें इस स्टडी में सहायता दी है।

विश्व में टीबी के अतिरिक्त 63 लाख केस मिल सकते हैं

विश्व में टीबी के अतिरिक्त 63 लाख केस मिल सकते हैं

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि तीन महीने के लॉकडाउन की वजह से 2021 में विश्व में टीबी के केस और उससे होने वाली मौत की स्थिति वहीं पहुंच सकती है, जो 5 से 8 साल पहले थी। यानि इन मामलों में उतना इजाफा देखने को मिल सकता है,जो 2013 और 2016 के बीच की स्थिति थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 'दुनियाभर में हमें 2020 से 2025 के बीच टीबी के अतिरिक्त 63 लाख केस देखने को मिल सकते हैं और इस दौरान इसकी वजह से 14 लाख लोगों की जान भी जा सकती है। '

एड्स से मौतों में हो सकता है भारी इजाफा

एड्स से मौतों में हो सकता है भारी इजाफा

एक और स्टडी में पता चला है कि कोरोना वायरस के चलते मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या दोगुनी हो सकती है। वहीं अगर एड्स नियंत्रण में कोरोना के चलते रुकावट आई तो सब-सहारन अफ्रीका में 2020-21 में सिर्फ 6 महीने एंटी-वायरल थेरेपी में रुकावट से 5 लाख लोगों की अतिरिक्त मौत हो सकती है। कनाडा में मैकगिल यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल टीबी सेंटर की डायरेक्टर मधु पाई के मुताबिक, 'जिन लोगों को एचआईवी है उनके लिए सबसे बड़ी चिंता एंटी-रेट्रोवायरल्स का छूट जाना है। भारत के मलेरिया प्रभावित इलाकों में बड़ी समस्या ये है कि जिन बच्चों को तेज बुखार है उनकी जांच न हो पाए और उनका मलेरिया का इलाज ही न हो। इससे मलेरिया से होने वाली मौतों का खतरा बढ़ जाएगा।'

भारत में टीबी की जांच में 70% गिरावट की आशंका

भारत में टीबी की जांच में 70% गिरावट की आशंका

इसी तरह मेडिसिंस सैंस फ्रंटियर्स ऐक्सेस कैंपेन की दक्षिण एशिया हेड लीना मेंघने का कहना है कि आने वाले 5 वर्षों में इस तरह की बीमारियों से होने वाली मौतों में क्रमश: 10-20 और 36 फीसदी का इजाफा देखने को मिल सकता है। जबकि कोरोना के चलते टीबी की जांच में 70% की गिरावट आने के चलते भारत में इसकी मौत का दर कई गुना बढ़ने का खतरा है

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