'बलात्कारी' राम रहीम के बाद अब 'अधर्मी' संत रामपाल की बारी, सजा पर फैसला आज
नई दिल्ली। 'बलात्कारी बाबा' गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के मामले में सजा दिए जाने के बाद मंगलवार यानी कि 29 अगस्त को एक और 'अधर्मी बाबा' का नंबर लग सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं हरियाणा के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम संचालक संत रामपाल की जिसपर चल रहे चार में से दो मामलों में हिसार कोर्ट आज सजा का ऐलान कर सकती है। बीते बुधवार को संत रामपाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर नंबर 201, 426, 427 और 443 के तहत पेशी हुई थी। कोर्ट ने एफआईआर नंबर 426 और 427 का फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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संत रामपाल पर एफआईआर नंबर 426 में सरकारी कार्य में बाधा डालने और 427 में आश्रम में जबरन लोगों को बंधक बनाने का केस दर्ज है। इन दोनों केसों में संत रामपाल के अलावा प्रीतम सिंह, राजेंद्र, रामफल, विरेंद्र, पुरुषोत्तम, बलजीत, राजकपूर ढाका, राजकपूर और राजेंद्र को आरोपी बनाया गया है। बताते चलें कि कबीर पंथी विचारधारा के समर्थक संत रामपाल दास देशद्रोह के एक मामले में इन दिनों हिसार जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि बरवाला में हिसार-चंडीगढ़ रोड स्थित सतलोक आश्रम में नवंबर 2014 में सरकार के आदेश के बाद पुलिस ने आश्रम संचालक रामपाल के खिलाफ कार्रवाई की थी। पुलिस ने रामपाल को 20 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया था।
कौन है संत रामपाल
सोनीपत के धनाणा गांव में 8 सितंबर 1951 को जन्मा रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था। रामपाल के पिता का नाम नंद राम था जो पेशे से किसान थे। इंजीनियर की नौकरी के दौरान रामपाल की मुलाकात कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज हुई। रामपाल रामदेवानंद के शिष्य बन गया। नौकरी के दौरान ही रामपाल दास सत्संग करने लगा और 'संत रामपाल' बन गया। हरियाणा सरकार ने उसे 2000 में इस्तीफा देने को कहा था। 1999 में बंदी छोड़ ट्रस्ट की सहायता से रामपाल ने करोंथा गांव में सतलोक आश्रम का निर्माण करवाया। हरियाणा में हिसार के पास बरवाला में स्थित इस आश्रम की जमीन को लेकर रामपाल पर कई आरोप लगे। जेई से संत बने रामपाल हिन्दू धर्म की भगवानों को नहीं मानता। खुद को कबीरपंथी बताने वाला रामपाल स्वयं को ही परमेश्वर का एक रूप बताता है।
संत बनने की शुरुआत में रामपाल सोनीपत और रोहतक में मोटरसाइकिल पर माइक्रोफोन से अपने उपदेश का प्रचार-प्रसार किया करता था। इसके अलावा वह अपनी वीडियो भी रिकॉर्ड करवाता था। रामपाल के समर्थन ज्यादार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से थे। उन्हीं की मदद से उसने अपना प्रभाव और साम्राज्य बढ़ाया। इसके बाद संत रामपाल के अनुयायियों की संख्या बढ़ती चली गई। 2006 में स्वामी दयानंद की लिखी एक किताब पर संत रामपाल ने एक टिप्पणी की। आर्यसमाज इस टिप्पणी से नाराज हो गया। आर्य समाज और रामपाल समर्थकों में हिंसक झड़प हुई। इसमें एक महिला की मृत्यु हुई। झड़प के बाद पुलिस ने रामपाल को हत्या के मामले में हिरासत में लिया। 22 महीने जेल में रहने के बाद वह 30 अप्रैल 2008 को जमानत पर रिहा हुआ।













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