गिरफ्तारी के बाद भी महसूस हो रहा दाउद के भाई इकबाल कास्कर का खौफ
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई इकबाल कास्कर को पुलिस ने धर दबोचा है। जाहिर है अब दाऊद तक पहुंचने के रास्ते खुल सकते हैं, लेकिन अगर आप यह सोच रहे हैं कि इनका आतंक लोगों के दिमाग से खत्म हो जायेगा, तो ऐसा नहीं है। अब भी मुंबई के कुछ इलाकों में इकबाल का खौफ लोगों के दिलों में है।

मुंबई के नागपाड़ा और मुसाफिरखाना इलाकों में अब भी दाऊद इब्राहीम का आतंक साफ तौर पर महसूस किया सकता है। भले ही पुलिस ने कराची में रहने वाले डान के भाई इकबाल कस्कर को गिरफ्तार कर लिया फिरौती के आरोप में पर इस सारे इलाके में उनका राज चलता है।
पर अब सवाल है कि उसके खिलाफ गवाही देने कौन आएगा। उसका इस सारे इलाके में खासा आतंक है। बता दें कि इकबाल को 2003 में संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यार्पित कर भारत लाया गया था। पुलिस को दाऊद के पांचवें भाई की हत्या के मामले और सारा सहारा मामले में उसकी तलाश थी।
सारा सहारा मामले में सरकारी जमीन पर गैर कानूनी तरीके से एक इमारत का निर्माण किया गया था।, लेकिन साल 2007 में अदालत ने दोनों ही मामलों में उसे बरी कर दिया था।
जानलेवा हमला
बता दें कि इकबाल कास्कर पर फिरौती वसूलने और जानलेवा हमला करने का आरोप है। एस्टेट एजेंट सलीम शेख की शिकायत पर बायकुला पुलिस थाने में इकबाल कास्कर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। सलीम ने आरोप लगाया है कि इकबाल कास्कर और उसके आदमियों ने उसके साथ मारपीट करने के बाद तीन लाख रुपये की मांग की।
नागपाड़ा और मुसाफिरखाना
इसी नागपाड़ा और मुसाफिर खाना इलाकों में दाऊद के कई संबंधी रहते हैं। दाऊद की बहन का परिवार भी इधर ही रहता है। बता दें कि दाऊद इब्राहिम की बड़ी बहन हसीना पार्कर का पिछले साल निजी अस्पताल में निधन हो गया। हसीना को सीने में तीव्र दर्द की शिकायत के बाद दक्षिण मुंबई के नागपाड़ा इलाके में हबीब अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
हसीना पार्कर उस समय सुर्खियों में आई थी, जब अरुण गवली के नेतृत्व वाले कुछ प्रतिद्वंद्वी गैंगस्टरों ने उसके पति इस्माइल पार्कर की 1991 में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद दाऊद गिरोह ने प्रतिशोध में कई हत्याओं को अंजाम दिया था। उसके बाद से हसीना पार्कर दाऊद का मुंबई कारोबार देख रही थी। कहते हैं कि दाऊद के लोगों का दक्षिण मुंबई के कुछ इलाकों में अब तगड़ा असर है। उसकी मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिल सकता था।












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