रहे सर्तक क्योंकि 2015 में दोगुनी हो सकती है साइबर क्राइम
नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध के मामलों की संख्या 2015 में तीन लाख हो सकती है। यह संख्या एक साल पहले के मुकाबले दोगुनी है। यह जानकारी एक अध्ययन से मिली। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने संयुक्त एसोचैम-महिंद्रा एसएसजी अध्ययन 'साइबर एंड नेटवर्क सिक्युरिटी फ्रेमवर्क' जारी करते हुए कहा, "अधिक चिंताजनक बात यह है कि इन अपराधों के स्रोत मुख्यत: देश से बाहर जिन देशों में हैं, उनमें चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अल्जीरिया जैसे देश भी शामिल हैं।"

साइबर अपराध के मामलों की संख्या अभी देश में 1,49,254 है, जो 2015 में बढ़कर तीन लाख हो सकती है। यह सालाना 107 फीसदी की वृद्धि है। अध्ययन के मुताबिक हर महीने देश में 12,456 मामले दर्ज किए जाते हैं। अध्ययन के मुताबिक 2011, 2012, 2013 और 2014 में कुल दर्ज किए गए साइबर अपराधों की संख्या क्रमश: 13,301, 22,060, 71,780 और 62,189 (मई तक) थी।
अध्ययन में कहा गया है कि इन अपराधों के तहत ऑनलाइन बैंक खातों की फिशिंग और एटीएम या डेबिट कार्ड की क्लोनिंग आम बात है। ऑनलाइन बैंकिंग या वित्तीय लेन देन के लिए मोबाइल, स्मार्टफोन या टैबलेट के बढ़ते प्रयोग के कारण इन अपराधों को अंजाम देने में सुविधा हो रही है। अपराध को अंजाम देने वालों में अधिकतर की उम्र 18-30 साल के बीच है।
अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक ये हमले जिन देशों से हो रहे हैं, उनमें अमेरिका, यूरोपीय देश, ब्राजील, तुर्की, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अल्जीरिया और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। 2014 में साइबर हमले के मामलों की संख्या में भारत का स्थान जापान और अमेरिका के बाद तीसरा है।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र ऐसे तीन राज्य हैं, जहां नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मामले सर्वाधिक दर्ज किए गए हैं। अध्ययन के मुताबिक रोचक यह भी है कि यही तीन राज्य ऐसे हैं, जो आईटी और आईटी आधारित उद्योगों से होने वाली आय में 70 फीसदी से अधिक योगदान करते हैं।












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