कर्नाटक: 15 दिन से घटकर 72 घंटे हो सकता है येदुरप्पा को बहुमत साबित करने का समय!
बेंगलुरू: कर्नाटक में बीएस येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली लेकिन अभी उन्हें बहुमत भी साबित करना होगा। कर्नाटक में बहुमत के लिए जरूरी नम्बर नहीं होने के बावजूद भाजपा को राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्योता दिया और येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन इसी का विरोध करते हुए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार आधी रात के बाद सुनवाई की थी। इसी मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि येदुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए कितना वक्त दिया जाए।

सुप्रीम में आज कर्नाटक के भविष्य का फैसला
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एके सीकरी की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने ना तो कर्नाटक मामले में सरकार बनाने से संबंध में दायर याचिका खारिज भी नहीं की थी और ना ही शपथ ग्रहण से रोका था। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए शुक्रवार का समय दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट इसी मामले में सुबह 10.30 बजे सुनवाई करेगा। लेकिन इसके पहले कयासों का दौर चल पड़ा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट येदुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए कितना वक्त दे सकता है। पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसे कई मामले रहे हैं जिनके आधार पर ये अनुमान लगाया जा रहा है कि भाजपा को कम से कम 3 दिनों का वक्त दिया जा सकता है।

शिबू सोरेन को शिबू सोरेन ने दिया था 19 दिनों का समय
साल 2005 झारखंड में शिबू सोरेन के नेतृत्व में कांग्रेस-जेएमएम के गठबंधन को कम सीटें होने के बावजूद राज्यपाल शिब्ते रजी द्वारा सरकार बनाने को आमंत्रित किया गया था। उस वक़्त एनडीए के पास 36 सीटें थीं और जेएमएम-कांग्रेस गठजोड़ के पास 26 सीटें थीं। फिर भी सोरेन को बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल ने 19 दिनों का समय दे दिया था। राज्यपाल के इस फैसले के विरोध में भाजपा सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत साबित करने की अवधि को 15 दिन से घटाकर 2 दिन कर दिया और फिर सोरेन सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी थी।

गोवा में भी बदला था बहुमत साबित करने का समय
वहीं गोवा में मार्च, 2017 में राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने 40 सीटों के सदन में 17 सीटों वाली कांग्रेस को नहीं बल्कि 13 सीटों वाली भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। इसके बाद मनोहर पर्रिकर ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली और उन्हें भी बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन दिए गए थे। जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तब कोर्ट ने 15 दिन को 2 दिन में बदल दिया लेकिन इस बार उनकी सरकार बच गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन के अनुसार कोर्ट अगर बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन की अवधि को 48 घंटों में बदलती है तो दिन रविवार पड़ेगा। इस स्थिति में 72 घंटे यानी 3 दिन बाद मुख्यमंत्री को अपना बहुमत सदन में साबित करना होगा। वहीं नवगठित विधान सभा का कार्यकाल सोमवार से शुरू होता है, अगले दो दिन शनिवार और रविवार होने के कारण येदुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए तीन दिनों यानी सोमवार तक का वक़्त मिल सकता है। बता दें कि बीजेपी बहुमत साबित करने की पूरी कोशिश कर रही है जबकि कांग्रेस-जेडीएस अपने-अपने विधायकों को भाजपा की पहुंच से दूर रखने की कोशिश में जुटी है।












Click it and Unblock the Notifications