बदलेंगे अंग्रेजों के जमाने के 3 कानून, Criminal Laws में बदलाव के लिए गृहमंत्री ने पेश किए 3 नए विधेयक
केंद्र सरकार ने अंग्रेजों के जमाने की महत्वपूर्ण निशानियां मिटाने के लिए शुक्रवार को संसद में तीन पुराने आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए तीन नए विधेयक पेश किए हैं। इससे देश के आपराधिक कानूनों में बहुत बड़े बदलाव होने के आसार हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने इन तीनों विधेयकों को पेश करते हुए कहा है कि 'इसका लक्ष्य सजा नहीं, न्याय देना है।'
तीन आपराधिक कानून बदलेंगे
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को संसद में भारतीय दंड संहिता (IPC),दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) को खत्म करने और उनकी जगह नए कानून लाने का प्रस्ताव रखा है।

मॉब लिंचिंग के लिए मृत्युदंड का प्रावधान
सदन में विधेयक पेश हुए गृहमंत्री ने कहा है कि विधेयकों में विवादास्पद राजद्रोह कानून को समाप्त करने का प्रावधान है। साथ ही मॉब लिंचिंग के मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान किया जाएगा। विधेयकों को पेश कि जाने के साथ ही अमित शाह ने कहा कि इन्हें संसद की स्थायी समिति में विचार के लिए भेजा जाएगा।
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इसका लक्ष्य सजा नहीं, न्याय देना है- अमित शाह
ब्रिटिश हुकूमत के कालखंड वाले आपराधिक कानूनों में बदलाव का बिल पेश करते हुए गृहमंत्री ने कहा, '16 अगस्त से आजादी का 75 से 100 वर्ष का रास्ता शुरू होगा। प्रधानमंत्री ने गुलामी की मानसिकता को समाप्त करने का संकल्प लिया था। हम आईपीसी (1857), सीआरपीसी (1858), इंडियन एविडेंस ऐक्ट (1872) को खत्म करेंगे, जो कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए थे। इसकी जगह पर हम तीन नए कानून लाएंगे, ताकि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्ति हो सके। इसका लक्ष्य सजा नहीं, न्याय देना है।'
आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता
गृहमंत्री ने यह भी कहा है कि 'लोग अदालतों में जाने से डरते हैं...क्योंकि उन्हें लगता है कि कोर्ट में जाना ही सजा है....' गृहमंत्री ने लोकसभा को बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता लेगा। पहले इसमें 511 धाराएं थीं, इसकी जगह अब 356 ही धाराएं होंगी। 175 धाराओं में संशोधन किया गया है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता विधेयक
इसी तरह सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लेगा। वहीं इंडियन एविडेंस ऐक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य संहिता लेगा। जानकारी के मुताबिक विवादास्पद राजद्रोह कानून (आईपीसी की धारा 124ए) को खत्म कर दिया गया है; और देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए एक धारा (धारा 150) लाया जाएगा।
क्रिमिनल लॉ रिफॉर्म्स कमेटी ने दिया था सुझाव
केंद्र सरकार ने 2020 के मार्च में एक क्रिमिनल लॉ रिफॉर्म्स कमेटी बनाई थी। इसे आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस ऐक्ट 1872 में सुधार के लिए सुझाव देने थे। इस समिति की अध्यक्षता तब के दिल्ली स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर रनबीर सिंह को दी गई थी। इसके अलावा समिति में एनएलयू-डी के तब के रजिस्ट्रार प्रोफेसर डॉक्टर जीएस बाजपेयी, डीएनएलयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर बलराज चौहान, वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और दिल्ली के पूर्व जिला और सत्र न्यायधीश जीपी थरेजा भी शामिल थे।
2022 के फरवरी में जनता से सुझाव लेने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। 2022 के अप्रैल में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा को जानकारी दी थी कि केंद्र सरकार ने आपराधिक कानूनों की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है।












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