कोविड डेथ गाइडलाइन में सुसाइड वाले एंगल पर SC को आपत्ति, कहा- केंद्र फिर से करे विचार
नई दिल्ली, 13 सितंबर: हाल ही में कोविड डेथ से संबंधित गाइडलाइन केंद्र सरकार ने जारी की थी। जिसमें पॉजिटिव पाए जाने के 30 दिन के अंदर मौत के मामले को कोविड डेथ मानने की बात कही गई। केंद्र ने साफ कर दिया था कि अगर मरीज आत्महत्या करता है या फिर उसका एक्सीडेंट हो जाता है, तो उसे कोविड डेथ नहीं माना जाएगा। इसमें आत्महत्या वाले एंगल पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। साथ ही सरकार को फिर से विचार करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 23 सितंबर तक मौत की वजह का प्रमाणपत्र और मुआवजे के मामले में केंद्र सरकार गाइडलाइन जारी कर, अनुपालन रिपोर्ट खंडपीठ के सामने पेश करे। इसके अलावा सरकार ने कोरोना पॉजिटिव मरीज के आत्महत्या को कोविड डेथ नहीं मानने की बात कही है। ये स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस बिंदु को लेकर गाइडलाइन के कई मुद्दों पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 23 सितंबर को होगी।
गाइडलाइन में हैं ये बातें
केंद्र ने अब साफ कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है। तो पॉजिटिव पाए जाने के दिन से 30 दिन के अंदर उसकी मौत होने पर उसे कोविड डेथ माना जाएगा। इसके लिए मरीज के परिजनों को रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ एक्ट 1969 की धारा 10 के तहत जो फॉर्म-4 और 4ए जारी किया जाएगा, उसमें मौत का कारण कोविड-19 डेथ लिखा होगा। अगर मरीज कारण से संतुष्ट नहीं है, तो उसके लिए भी प्रावधान किया गया है। जिसमें जिलास्तर की एक कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल या मेडिसिन विभाग के हेड और सब्जेक्ट एक्सपर्ट होंगे, जो मौत का आधिकारिक दस्तावेज जारी करेंगे। ये नियम अस्पताल के साथ घर पर इलाज करवा रहे मरीजों पर भी लागू है।












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