Covid 19: क्या होता है 'सीरो सर्वे', जानिए इसके बारे में सब कुछ यहां

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में हुए 'सीरो सर्वे' में ये बात सामने आई है कि राजधानी में 23.48 फीसदी लोगों पर कोरोना अटैक हो चुका है, जिसका अर्थ ये हुआ कि दिल्ली के हर चौथे इंसान के अंदर एंटीबॉडीज डिवेलप हो चुकी है,यानी के ये लोग कोरोना वायरस से हल्का संक्रमित होने के बाद खुद ही ठीक हो गए है, जिसके बाद दिल्ली के जल्द ही कोरोना मुक्त होने की बात कही जा रही है, दरअसल एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा था कि दिल्ली में कोरोना अपने पीक पर पहुंच चुका है, ऐसे में अब दिल्ली के के 'हर्ड इम्युनिटी' हासिल करने यानी कोरोना प्रूफ होने की उम्मीद बढ़ गई है।

ऐसे में यहां ये समझना बहुत जरूरी है कि आखिर 'सीरो सर्वे' और 'हर्ड इम्युनिटी' क्या होता है?

क्या है 'सीरो सर्वे'?

क्या है 'सीरो सर्वे'?

'सीरो सर्वे' में हॉटस्पॉट वाले इलाकों के एक ब्लड ग्रुप वाले लोगों का सीरम लेकर जांच की जाती है, इसके लिए परिवार की हिस्ट्री भी पता की जाती है, लेकिन इसके पहले स्वास्थ्य टीम लोगों के घरों में जाकर पहले उनसे लिखित परमिशन लेती है, यह सर्वे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अधिकारियों और राज्य के स्वास्थ्य विभागों के सहयोग से किया जाता है, यहां बता दें कि आईसीएमआर ने देश के 24 हजार लोगों पर 'सीरो सर्वे' कराया था।

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    क्या है इस सर्वे का उद्देश्य

    क्या है इस सर्वे का उद्देश्य

    'सीरो सर्वे' की मदद से यह पता लगाया जाता है कि क्षेत्र में कोरोना वायरस का संक्रमण कितना फैला है और पूरी आबादी का कितना बड़ा हिस्सा कोरोना से संक्रमित है और कितने लोगों के अंदर इस वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बन चुकी है और कितने शरीर में एंटीबॉडी पैदा हो चुकी है।

    कैसे होती है रिपोर्ट तैयार

    कैसे होती है रिपोर्ट तैयार

    इस सर्वे में पहले लोगों के ब्लड सैंपल लिया जाता है और उसके बाद 30 मिनट के अंदर यह पता लगाया जाता है कि जिस व्यक्ति का सैंपल लिया गया है, उसके अंदर वायरस से लड़ने के लिए इम्यूनिटी विकसित हुई है या नहीं। सैंपल की जांच के लिए एक विशेष किट का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है, लेकिन उसमें लक्षण नहीं दिखते, तो ये माना जाता है कि ऐसे लोगों में 5-7 दिन के अंदर अपने आप एंटीबॉडी बनना शुरू हो गई होगी।

    क्या है 'हर्ड इम्युनिटी'?

    क्या है 'हर्ड इम्युनिटी'?

    दरअसल हर्ड का मतलब होता है 'झुंड' और 'हर्ड इन्यूनिटी' का अर्थ होता है 'सामूहिक रोग प्रतिरोधक', इसक मतलब ये हुआ कि यदि कोरोना वायरस को सीमित रूप से फैलने का मौका दिया जाए तो इससे सामाजिक स्तर पर एक रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी, जो कि कोरोना वायरस को खुद ब खुद कमजोर कर देगा ।'हर्ड इन्यूनिटी' मेडिकल साइंस की एक बहुत पुरानी प्रक्रिया है, जिसमें आबादी के एक तय हिस्से को किसी भी वायरस से संक्रमित कर दिया जाता है और एक बार बीमारी लगने के बाद एक ही व्यक्ति को दोबारा कभी वह बीमारी नहीं लगती, क्योंकि शरीर खुद ही उस बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा तैयार कर लेता है।

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