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मजदूरों की हालत देख भावुक हुए विश्वास, FB पर बयां किया दर्द

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मुंबई। कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच मजदूरों को पलायन रूकने का नाम नहीं ले रहा है, प्रवासी मजदूरों का बेरोजगार होकर अपने गांव की ओर जाना एक बड़ी परेशानी बन गया है, देश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सोमवार से चौथे चरण का लॉकडाउन भी शुरू हो गया है, सरकार की ओर से प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए कई ट्रेनें-बसें चलाई गयी हैं लेकिन वो नाकाफी साबित हो रही हैं, पैदल अपने घरों के लिए निकले मजदूर सड़क हादसों के शिकार हो रहे हैं, सड़कों पर यूं दम तोड़ती जिंदगी देखकर कवि डॉ. कुमार विश्वास का दिल भर आया है, उन्होंने अपना गुस्सा और दर्द फेसबुक पर जाहिर किया है।

    Lockdown 4 : Migrant Workers की हालत देख भावुक हुए Kumar Vishwas,ऐसे बयां किया दर्द | वनइंडिया हिंदी
    'बिलखते हुए बच्चे...तुझसे जवाब मांगेंगे'

    'बिलखते हुए बच्चे...तुझसे जवाब मांगेंगे'

    कुमार विश्वास ने फेसबुक पर लिखा है कि ये रोती मांएं, बिलखते हुए बच्चे, बूढ़े, बड़ी हवेलियो, खुशहाल मोहल्ले वालों, कटे अंगूठों की नीवों पे खड़े हस्तिनापुर! ये लोग एक दिन तुझसे जवाब मांगेंगे, कुमार विश्वास की ये पोस्ट इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग उस पर कमेंट कर रहे हैं।

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    'जरूरत के वक्त रो-रोकर तमाशा देखो'

    'जरूरत के वक्त रो-रोकर तमाशा देखो'

    इससे पहले भी कुमार विश्वास ने अपना गुस्सा ट्विटर पर जाहिर किया था, उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था कि 2महीने पहले भी यही दृश्य, 2महीने बाद भी? और इन सारी सरकारों से अपने कर्मों पर छाती पिटवाने वाली प्रेस-कॉन्फ़्रेंस रोज करा लो TV पर पता नहीं क्या दुर्भाग्य है देश का जो ख़ून जला-जलाकर कमाया हुआ पैसा इन्हें दो और जरूरत के वक्त रो-रोकर तमाशा देखो ! कुछ बोलो तो इनके पालतू झेलो।

    भयावह है स्थिति

    मालूम हो कि लॉकडाउन की वजह से दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे मजदूरों ने ट्रेन, बस और निजी वाहन नहीं मिलने के कारण पैदल ही अपने घरों का रुख कर दिया है। जिस वजह से सड़क हादसों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों की मौत के ये आंकड़े केंद्र और राज्य सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं।

    डरा रहे हैं आंकड़ें

    डरा रहे हैं आंकड़ें

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 54 दिनों में 134 प्रवासी मजदूरों ने अलग-अलग हादसों में अपनी जान गंवाई है। जिसमें से ज्यादातर मौतें लॉकडाउन-3 के ऐलान के बाद हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक 6 मई से सड़कों और रेल की पटरियों पर 19 अलग-अलग घटनाओं में 96 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई है।

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    English summary
    Dr kumar vishwas slams government on migrant labourers/workers problems, See His Reaction.
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