Cough Syrup: किस कंपनी का था ये कफ सिरप? जिसके सेवन से MP के छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौत हो गई
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा (Chhindwara) जिले में पिछले पखवाड़े में 9 बच्चों की मौत ने सोचने पर मजबूर कर दिया है। जो मामले पहले मौसमी बुखार (Seasonal Fever) के लग रहे थे, उन्होंने अब किडनी (Kidney) फेल्योर का एक घातक रूप ले लिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका है कि इन मौतों का सीधा संबंध किसी दूषित कफ सिरप (Contaminated Cough Syrups) के सेवन से हो सकता है। इस हृदय विदारक त्रासदी ने देशभर की स्वास्थ्य एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि यह सीधे मासूमों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है।

सिरप पीने से 9 बच्चों की मौत
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छिंदवाड़ा में अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसकी पुष्टि परासिया के उप-मंडल मजिस्ट्रेट शुभम यादव ने की है। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डेक्सट्रोमेथॉर्फ़न हाइड्रोब्रोमाइड (Dextromethorphan Hydrobromide) सिरप के बैचों की जांच शुरू कर दी है और राज्यव्यापी रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा 1,420 बच्चों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिनमें सर्दी और फ्लू जैसे लक्षण हैं। जांच में यह साफ हुआ है कि ये मौतें पानी या मच्छर जनित कारणों से नहीं हुई हैं, जिससे संदेह पूरी तरह दवाओं पर टिक गया है।
मासूमों का 'कातिल' कफ सिरप कौन?
अब बात उस सवाल की, जो पूरे देश को चिंतित कर रहा है: आखिर यह जानलेवा दवा किस कंपनी की थी? अधिकारियों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक 9 बच्चों में से कम से कम 5 ने 'Coldref' नामक सिरप लिया था, जबकि एक बच्चे के सेवन की हिस्ट्री में 'Nextro' सिरप पाया गया है।
दवा बनाने वाली कंपनी का नाम अभी आधिकारिक जांच के अधीन है और जांच पूरी होने के बाद ही उसका खुलासा होगा, लेकिन इन दो ब्रांड्स के सिरप ही सीधे तौर पर पीड़ितों से जुड़े मिले हैं। राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों ने भी तुरंत कदम उठाते हुए एहतियातन 19 संदिग्ध बैचों की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है।
जांच एजेंसियों ने संभाला मोर्चा
इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार की नोडल एजेंसी नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अस्पतालों और अन्य स्थानों से दवा के सैंपल एकत्र किए हैं। इन सैंपलों की जांच की जा रही है, ताकि दूषित सिरप की पुष्टि हो सके। निजी डॉक्टरों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी वायरल मरीज का इलाज निजी तौर पर न करें, बल्कि सीधे सरकारी सिविल अस्पताल भेजें।












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