अब भ्रष्ट बैंक अफसरों की खैर नहीं

Corrupt bank officials are under scanner
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। पिछले शनिवार को सीबीआई के रिश्वत के आरोप में सिंडीकेट बैंक के चेयरमैन व मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुधीर कुमार जैन को हिरासत में लेने के बाद सरकार की नींद खुल गई है। अब उसने सरकारी बैंकों के शिखर अफसरों के कामकाज पर पैनी नजर रखने का फैसला किया है।

इस बारे में मंगलवार को वित्त मंत्रालय में फैसला लिया गया। बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली भी थे। जिन बैंकों का बैड लोन बढ़ता जा रहा है, उनके आला अफसरों पर खासतौर पर सरकार की नजर रहेगी।

सीबीआई ने जैन के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले में केस दर्ज किया है। सीबीआई ने बैंगलुरु, भोपाल, दिल्ली और मुंबई में लगभग 20 जगहों पर छापेमारी कर 50 लाख रुपये भी जब्त किये हैं।

इस मामले की रोशनी में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के गवर्नेंस की समीक्षा की जरूरत है। मौजूदा कारोबारी साल की मौद्रिक नीति की तीसरी द्विमाही समीक्षा के बाद राजन ने कहा, 'मैं यह सलाह देना चाहूंगा कि सरकारी बैंकों के गवर्नेंस की समीक्षा हो। उसमें खामियों को समझा जाए और उसे सुधारा जाए।

सिंडिकेट बैंक की घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'सिंडिकेट बैंक मामले में जांच चल रही है, लेकिन मेरे खयाल से इस घटना को समूची बैंक व्यवस्था पर लागू करके देखते समय सावधानी बरतनी चाहिए।'

महत्वपूर्ण है कि जैन की गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को सूचित कर दिया था कि जैन के ऊपर गंभीर आरोप हैं और उन्हें कभी भी रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा सकता है।

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