औरतों के लिए टायलेट बनेंगे तो घटेंगे रेप

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। टाटा समूह की चोटी की कंपनी टीसीएस, भारती एयरटेल, रामप्रस्थ डवलपर्स, आदित्य बिड़ला ग्रुप, आईटीसी और अडानी ग्रुप दिल खोलकर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में टायलेट बनाने के लिए सरकार को मदद देने के लिए आगे आए हैं।

Corporate India ready to make toilets for women

इस बीच, महिलाओं के अधिकारों के लिए सक्रिय और दिल्ली की नगर सेविका बहन प्रीति का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में औरतों के लिए पर्याप्त टायलेट बनने से रेप के मामले भी कम होंगे। उन्होंने कहा कि बहुत सारे रेप के मामले तब होते हैं जब औरतें अंधेरे में दीर्घ शंका के लिए जारी रही होती है।

इस बीच,सीआईआई के प्रवक्ता तरेश अऱोड़ा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वाधीनता दिवस कॉरपोरेट इंडिया को देश के ग्रामीण इलाकों में टायलेट बनाने के लिए आगे आने का आहवान किया था। उस आहवान का बड़ा ही सकारात्मक असर रहा और कॉरपोरेट घराने अपने दायित्वों का निर्वाह करने के लिए आगे आ रहे हैं।

सुलभ-कॉरपोरेट इंडिया साथ-साथ

रामप्रस्थ डवलपर्स के सीईओ निखिल जैन कहा कि वे एनसीआर क्षेत्र के गांवों में टायलेट बनाने के लिए सरकार को आर्थिक मदद देने के लिए तैयार है। इस बीच, सुलभ शौचालय ने भी अपनी तरफ से ग्रामीण क्षेत्रों में कॉरपोरेट घरानों के साथ मिलकर युद्धस्तर पर औरतों के लिए टायलेट बनाने का इरादा जाहिर किया है। सुलभ शौचालय के प्रवक्ता एसपी सिंह ने कहा कि औरतों के लिए ग्रामीण इलाकों और लड़कियों के स्कूलों में टायलेट बनाने को बेहद गंभीरता से लेने की जरूरत है।

टीसीएस ने कहा है कि वह 10,000 स्कूलों में लड़कियों के लिए सैनिटेशन सुविधाओं पर 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। भारती एयरटेल ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया है। उऩका फोकस पंजाब का लुधियाना होगा, जो कंपनी के फाउंडर मित्तल परिवार का पैतृक शहर है।

उधर, अडानी ग्रुप ने कहा है कि उसका राज्य में पहले से मौजूद सैनिटेशन सीएसआर प्रोजेक्ट महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश तक बढ़ाया जाएगा। इसकी देखरेख अडानी फाउंडेशन करेगा। आदित्य बिड़ला ग्रुप की सीएसआर यूनिट आदित्य बिड़ला सेंटर की योजना इस साल 10,000 टॉइलट बनाने की है। बिड़ला समूह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और गुजरात पर फोकस किया जाएगा।

वरिष्ठ पत्रकार हरीश चोपडा ने बताया कि हरियाणा जैसे सम्पन्न सूबों में महिलाओं के लिए घरों में टायलेट बेहद कम है। उन्होंने बतदाया कि उन्होंने पिछला लोकसभा चुनाव कवर किया था। इस दौरान वे करनाल गए। करनाल लोकसभा सीट के करीब 300 गांवों में ज्यादातर औरतें के लिए टायलेट नाम की कोई चीज नहीं है।

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