ओमिक्रॉन के खतरे के बीच डब्ल्यूएचओ ने कही बूस्टर डोज दिए जाने की बात, साथ में लगाई ये खास शर्त
नई दिल्ली, 23 दिसंबर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ ने ये भी साफ किया है कि बूस्टर खुराक फिलहाल हाई रिस्क वाले ग्रुप (जिनके बीमारी की चपेट में आने की आशंका ज्यादा हो) को ही दी जानी चाहिए। बुधवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा कि बूस्टर खुराक पूरी तरह से सबूतों पर आधारित होनी चाहिए और प्राथमिकता के तौर पर ये उच्च जोखिम वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए होनी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ के टीकाकरण पर विशेषज्ञों के रणनीतिक सलाहकार समूह (एसएजीई) ने कुछ समय पहले कहा है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक के छह महीने बाद गंभीर कोविड बीमारी के खिलाफ टीके की सुरक्षा कम हो जाती है। ऐसे में वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जानी चाहिए। एसएजीई के इस आंकलन के बाद अब डब्ल्यूएचओ का ये बयान आया है।
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भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से अनुशंसित दो प्राथमिकता समूहों को बूस्टर खुराक देने पर विचार कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस बयान का भारत के लिए बहुत महत्व है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों का सख्ती से पालन कर रहा है। भारत ने इस साल 16 जनवरी से अपना टीकाकरण क्रायक्रम शुरू कर दिया था।
जिन देशों में टीकाकरण धीमा उनकी ओर भी देखा जाए
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख टेड्रोस घेब्रेयेसस ने कोरोना का बूस्टर डोज लगाए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच कहा है कि दुनिया के अमीर देश अपने यहां लोगों को बूस्टर डोज लगा रहे हैं लेकिन कई देशों में लोगों को पहला और दूसरा डोज भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे महामारी खत्म नहीं होगी बल्कि कोविड-19 के लंबे समय तक रहने की संभावना बनेगी। ड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अस्पतालों में भर्ती या मरने वाले लोगों में बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसको टीका नहीं लगा है।












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