Coronavirus: ईरान में फंसे 1200 भारतीयों को टेस्टिंग के बाद लाया जाएगा भारत, अस्थायी लैब बनाने की प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली। भारत, ईरान में फंसे अपने 1200 नागरिकों की टेस्टिंग के लिए एक अस्थायी लैबोरेट्री बनाने की योजना बना रहा है। अधिकारियों की तरफ से इस बारे में जानकारी दी गई है। कोरोना वायरस की वजह से ईरान में अब तक करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है। इस देश में जो भारतीय हैं उनमें से सबसे ज्यादा छात्र और तीर्थयात्री हैं और भारत इन्हें निकालने से पहले कोरोना वायरस की टेस्टिंग कराने पर विचार कर रहा है। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन की तरफ से भी इस तरफ इशारा किया गया था। अभी तक ईरान की सरकार की तरफ से इस बात की मंजूरी भारत को नहीं मिली है।

चार वैज्ञानिक भेजे गए ईरान
हर्षवर्धन ने कहा, 'अगर ईरान की सरकार हमें मदद करती हैं तो एक टेस्टिंग फैसिलिटी को शुरू किया जा सकता है। ताकि भारत लाने से पहले वहां पर भारतीयों की टेस्टिंग की जा सके।' नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजर (एनआईवी) के वैज्ञानिक को पुणे से ईरान भेजा गया है। जबकि काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की तरफ से तीन वैज्ञानिक बुधवार को शाम चार बजे ईरान रवाना हुए हैं। ये वैज्ञानिक वहां पर जाकर टेस्टिंग फैसिलिटी के लिए मौजूद सुविधाओं का जायजा लेंगे ताकि 1200 भारतीयों की टेस्टिंग की जा सके। हर्ष वर्धन ने बताया कि भारत लगातार ईरान की सरकार के संपर्क में हैं।
ईरान में लगातार बढ़ रहे हैं केसेज
वहां की सरकार पहले से ही दबाव में है क्योंकि लगातार संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की प्राथमिकता है कि वह अपने लोगों को जल्द से जल्द देश वापस ला सके। हर्षवर्धन ने कहा कि ईरान में तेजी से केसेज में इजाफा हो रहा है और ऐसे में भारत को इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में कम से चार से पांच दिन का समय लग सकता है। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि भारत अपने नागरिकों की टेस्टिंग कर सकेगा या नहीं। भारत ने अब तक जापान और चीन के वुहान से कोरोना वायरस के बीच ही 881 लोगों को निकाला है।












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