स्टडी में दावा- इम्यून से बच निकलने में सक्षम है डेल्टा वेरिएंट, दोबारा संक्रमण की बन रहा वजह
नई दिल्ली, 25 जून। कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट अपनी संक्रमण फैलाने की क्षमता के चलते भारत में प्रमुख वेरिएंट बन चुका है। अब एक नए अध्ययन में सामने आया है कि डेल्टा वेरिएंट इम्यूनिटी को दरकिनार करते हुए लोगों को अपना निशाना बना रहा है और बहुत सारे लोग जो एक बार संक्रमित होने के बार ठीक होकर इम्यूनिटी विकसित कर चुके हैं वे दोबारा से संक्रमित हुए हैं। अध्ययन में यह सामने आया है कि वायरस में अनूठा उत्परिवर्तन इसे अधिक संक्रामक बनाता है और उच्च वायरल लोड की ओर ले जाता है जो बड़ी मात्रा में संक्रमण की वजह बनता है।

इस शोध को भारत के शोधकर्ताओं ने किया है जिसमें तीन भारतीय शहरों में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच प्रकोप पैटर्न को ध्यान में रखा गया है। प्रयोगशाला में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि वायरस किस तरह एंटीबॉडी के साथ-साथ फेफड़े की कोशिकाओं को संक्रमित करता है।
अध्ययन ने कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले हैं जिनमें से कुछ ब्रिटेन से आने वाले आंकड़ों में नजर आए हैं। शोधकर्ताओं में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की गुप्ता लैब के सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के वैज्ञानिक शामिल थे।
प्रतिरक्षा से बचने में सक्षम
शोध पत्र के लेखकों में से एक राजेश पांडे ने कहा "अध्ययन प्रमुख रूप से बताता है कि डेल्टा वेरिएंट में एक अच्छी प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता है। प्रयोगशाला के निष्कर्ष बताते हैं कि इसने दूसरे वेरिएंट को भी जल्दी से बदल दिया और स्वास्थ्य कर्मियों में अधिकांश ब्रेकथ्रू संक्रमण (पूर्ण टीकाकरण के बाद संक्रमण) का कारण बना। इसका मतलब यह है कि ऐसे समय में जब डेल्टा प्लस वेरिएंट भी आ गया है तब हमें बहुत सतर्क रहना होगा और उचित व्यवहार करना होगा। हम अभी भी इसकी प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता के बारे में कुछ नहीं जानते हैं और अध्ययन अभी शुरू हुआ है।"
शोध पत्र के एक दूसरे लेखक और आईजीआईबी के डायरेक्टर अनुराग अग्रवाल ने कहा "डेल्टा वेरिएंट में अभी तक देखी गई अधिकतम संक्रमण फैलाने की क्षमता देखी गई है और पिछले संक्रमणों और टीकों से न्यूट्रलाइजेशन प्रोटेक्शन को कम करता है।












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