Coronavirus: अस्पताल के हालातों पर इस अभिनेत्री का छलका दर्द, बोलीं-इमानदारी से टैक्स भरने का ये रिजल्ट?
मुंबई। कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में दहशत है। भारत भी इसके जद में आ चुका है। अबतक देश में 110 पॅाजिटिव केस सामने आ चुके हैं। राज्य सरकारें अलर्ट पर हैं और मेडिकल सुविधाएं पुख्ता होने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आई हैं जो इन दावों के पोल खोल रही हैं। एक्ट्रेस अमृता रायचंद ने कुछ ऐसी ही तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट की हैं। इस पोस्ट में रायचंद ने सवाल किया कि, '19 साल से टैक्स अदा कर रही हूं। क्या मुझे ऐसे अस्पताल में रहना होगा?'

अमृता ने आइसोलेशन वार्ड पर सवाल खड़े किए
रायचंद ने अपने इंस्टा पोस्ट में कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा कि 'मैंने 19 साल की उम्र से कमाना शुरू किया और तब से पूरी ईमानदारी के साथ टैक्स अदा कर रही हूं, लेकिन मैं इस सिस्टम से पूरी तरह निराश हो चुकी हूं। ईश्वर न करें अगर मुझे या मेरे परिवार का कोई सदस्य कोरोना वायरस का संक्रमित पाया जाता है तो मुझे ऐसे अस्पताल में रहना पड़ेगा? यह सरकारी कस्तूरबा अस्पताल है। इसके अलावा शहर में शायद ही कोई अस्पताल है, जहां Covid-19 का टेस्ट या इलाज हो सकता है।
अस्पताल में गंदगी थी
रायचंद ने लिखा- 'मेरे एक दोस्त को जब लगा कि उसमें कोरोना वायरस के लक्षण हैं तो वह अस्पताल गया, जहां शायद ही कोई उनका टेस्ट करना चाहता था। दोस्त के आग्रह पर उसे 40 मरीजों के साथ जनरल वार्ड में भर्ती किया गया। सभी संदिग्ध मरीजों के बेड एक दूसरे के बेहद करीब थे। जगह बेहद गंदी थी और वहां कोई कुछ खा-पी नहीं सकता था।'

अस्पताल को साफ रखने के लिए दो और स्टाफ नहीं रख सकते हैं?'
अपनी पोस्ट में रायचंद ने दावा किया कि उनके दोस्त को टेस्ट का रिजल्ट तक नहीं बताया गया। उन्होंने लिखा कि, 'उसे टेस्ट के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया। 24 घंटे बाद भी उन्हें 2 घंटे इंतजार करने को कहा गया।' अस्पताल की दयनीय हालत का जिक्र करते हुए रायचंद ने लिखा है, 'जब शाम 6 बजे तक अन्य संदिग्ध मरीजों को उनके कोरोना टेस्ट्स के रिजल्ट्स की जानकारी नहीं दी गई तो उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल ने रिजल्ट नहीं बताया तो वे चले जाएंगे। इसके बाद अस्पताल ने 20 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया।' रायचंद ने लिखा कि- 'बड़ा सवाल यह है कि अगर आप विरोध को रोकने के लिए लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं तो क्या अस्पताल को साफ रखने के लिए दो और स्टाफ नहीं रख सकते हैं?' रायचंद ने लिखा है, 'विभिन्न प्लेटफार्म्स के जरिये हमें अपने हाथों को धोने और खुद को वायरस से बचाने के लिए स्वच्छता बनाए रख का संदेश दिया जा रहा है!!! अस्पतालों में बुनियादी स्वच्छता भी नहीं है! मेरा मानना है कि हम वायरस से बच सकते हैं, लेकिन इन अस्पतालों के जरिये होने वाली दूसरी बीमारियों से मर सकते हैं!'












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