22 साल की कोरोना पॉजिटिव लेडी डॉक्टर बीमारी छिपाकर मुंबई से गुजरात पहुंची, अब झूठ बोल रही है

नई दिल्ली- देशभर में हजारों डॉक्टर अपनी जान की परवाह किए बगैर कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे हुए हैं। डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी ऐसे कोरोना वॉरियर हैं जो ड्यूटी के लिए कई-कई दिनों तक अपने घर तक नहीं जाते, अपने परिवार वालों से दूर रहते हैं। दिल पर पत्थर रखकर अपने बच्चों को अपने करीब नहीं आने देते। लेकिन, गुजरात में एक ऐसी लेडी डॉक्टर का पता चला है, जो खुद कोरोना संक्रमित होने की बात जानते हुए भी, इतनी गंभीर बीमारी को छिपाकर मुंबई से अपने गृहनगर भुज तक पहुंच गई। इस खुलासे के बाद उस महिला डॉक्टर के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, डॉक्टर का दावा है कि उसे संक्रमण का बाद में पता चला, लेकिन रिपोर्ट बताती हैं कि उसे पहले से ही सबकुछ पता था।

कोरोना लेकर मुंबई से गुजरात तक घूमती रही लेडी डॉक्टर

कोरोना लेकर मुंबई से गुजरात तक घूमती रही लेडी डॉक्टर

मुंबई की 22 साल की एक महिला डॉक्टर के खिलाफ कोविड-19 पॉजिटिव होने की बात छिपाकर मुंबई से अपने गृहनगर गुजरात के भुज तक की यात्रा करने का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उस लेडी डॉक्टर को पिछले 4 मई को ही उसकी कोविड-19 पॉजिटिव होने की रिपोर्ट मिल गई थी, यह जानते हुए भी वह 5 मई को मुंबई से भुज चली गई। खबरों के मुताबिक भुज पहुंचकर भी वह तीन दिनों तक इधर-उधर घूमती रही और 8 मई को वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों से मिलकर बताया कि मुंबई में उसने जो कोरोना वायरस का टेस्ट कराया था, उसमें उसके कोविड-19 पॉजिटिव होने की आज (8 मई को) पुष्टि हुई है। संक्रमण की जानकारी मिलते ही उस महिला डॉक्टर को स्थानीय जीके जेनरल अस्पताल ले जाया गया, जहां के डॉक्टरों को संदेह हुआ कि उसे कोविड-19 से इंफेक्टेड होने की जानकारी 8 मई को मिली।

तीन दिनों तक भुज शहर में कोरोना लेकर घूमती रही

तीन दिनों तक भुज शहर में कोरोना लेकर घूमती रही

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जीके जेनरल अस्पताल ने फौरन पुलिस से संपर्क किया और उस लेडी डॉक्टर के दावों पर अपना संदेह जता दिया। इसके बाद तहकीकात शुरू कर दी गई। जांच में इस बात की पुष्टि हो गई कि उसने 3 मई को ही टेस्ट करवाया था और उसे 4 मई को ही इंफेक्टेड होने की रिपोर्ट भी मिल गई थी, न कि 8 मई को जैसा कि उसने दावा किया है। इस खुलासे के बाद उस आरोपी डॉक्टर के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट, 2005 के संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। कच्छ (पश्चिम) के एसपी सौरभ तोलुंबिया ने कहा है कि यह जानते हुए भी कि वह जानलेवा वायरस से संक्रमित हो चुकी है, वह मुंबई से भुज आ गई और तीन दिनों तक शहर में घूमती रही। फिलहाल तो जीके जेनरल अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है।

बिना उचित ट्रैवल पास के मुंबई से भुज पहुंची

बिना उचित ट्रैवल पास के मुंबई से भुज पहुंची

जानकारी ये भी सामने आई है कि मुंबई के जेजे अस्पताल में प्रैक्टिस करने वाली उस महिला डॉक्टर ने अपने इंफेक्शन की बात छिपाकर दूसरों की जान को तो खतरे में डाला ही, उसने बिना जरूरी अनुमति प्राप्त किए यात्रा भी की और कच्छ में भी गलत पास के साथ दाखिल हो गई। वह जिस पास के साथ कच्छ में दाखिल हुई उसे गांधीनगर के कलेक्टर ने किसी राबरी खेंगरभाई वाश्रमभाई के नाम पर जारी किया था। मुंबई से भुज तक की दो लोगों की यात्रा के लिए यह पास इस शर्त पर जारी किया गया था कि यात्रा शुरू करने से पहले गंतव्य (कच्छ) के जिलाधिकारी से इसकी इजाजत ले ली जाएगी।

मुंबई से भी निकलने के लिए जरूरी कागजात नहीं थे

मुंबई से भी निकलने के लिए जरूरी कागजात नहीं थे

महिला डॉक्टर के खिलाफ हुए एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि आरोपी ने कच्छ के जिलाधिकारी से वहां आने की इजाजत नहीं ली थी। यही नहीं उसके पास मुंबई के अधिकारियों से महाराष्ट्र के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों में जाने की मंजूरी के संबंध में भी जरूरी कागजात नहीं थे।

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