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आतंकी हमला है असम नरसंहार, इसमें भी पाकिस्तान का हाथ!

गुवाहाटी। मंगलवार को असम के शोणिपुर और कोकराझार में नरसंहार हुआ, जिसमें 79 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। हमला देश के उत्तर-पश्च‍िम में हुआ था, इसलिये हर किसी का शक उल्फा के आतंकियों पर गया, लेकिन सच तो यह है कि इस हमले में भी पाकिस्तान का हाथ है। जी हां खुफिया विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हमले के पीछे नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट र्ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के दूसरे धड़े एनडीएफडी (एस) का हाथ है और उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त है।

वहीं एनडीएफबी जो अक्‍सर यह दावा करता है कि वह एक अलग बोडोलैंड की स्‍थापना के लिए काम कर रहा है, दरअसल अपने दावों से अलग काम कर रहा है। जो सच्‍चाई इसके बारे में सामने आईं हैं, वह वाकई हैरान करने वाली हैं।

बोडो नहीं है एनडीएफबी (एस) का मुखिया

एनडीएफबी का नेतृत्‍व जो शख्‍स करता है वह असल में बोडो ही नहीं है और उल्‍फा की ओर से उसे पे-रोल पर रखा गया है। उल्‍फा ने इस व्‍यक्ति को एंटी-टॉक्‍स टीम का हिस्‍सा बनाया हुआ है।

एनडीएफबी का जो हिस्‍सा इससे अलग हो चुका है उसका संगबिजित है और जिसे सिरसिंग इंग्‍ती के नाम से भी जाना जाता है। जो समूह उल्‍फा से अलग हुआ है उसे दरअसल उल्‍फा की ओर से बातचीत के लिए बनाए गए समूह का समर्थन हासिल है।

एक और खास बात जो संगबिजित के बारे में पता लगी है, उसके मुताबिक वह बोडो नहीं है बल्कि असम की कार्बी जनजाती का सदस्‍य है।

बातचीत प्रक्रिया को रोकने की कोशिश

मंगलवार को असम में जो कुछ हुआ है उसका मकसद किसी भी तरह की बातचीत के खिलाफ जाना है और बातचीत का विरोध करने के लिए ही मंगलवार को असम में मौत का तांडव संगबिजित के संगठन ने खेला।

इस संगठन को उल्‍फा की ओर से काफी बड़े स्‍तर पर वित्‍तीय समर्थन मिलता है। उल्‍फा हमेशा से ही भारत के राष्‍ट्रीय हितों के खिलाफ काम करता है आया है और एनडीएफबी ही शांति प्रक्रिया में बाधा डालने वाला संगठन है।

इस समय 16 ऐसे संगठन है जिनके साथ सरकार की बातचीत कर रही है और संगबिजित ने वर्ष 2012 में ही शांति प्रक्रिया को आतंकी कार्रवाई के जरिए पटरी से उतारने का काम किया था।

उल्‍फा को आईएसआई की ओर से बड़ी मात्रा में हथियार मिलते हैं और उल्‍फा ने इस बात को पूरी तरह से सुनिश्चित किया है कि एनडीएफबी (एस) को कभी भी आर्थिक परेशानी न हो और उसे हथियार भी मिलते रहें।

वर्ष 2012 में संगबिजित ने एनडीएफबी को तोड़ दिया था जो उस समय रंजन दाईमैरी की अगुवाई में अपने कामों को अंजाम दे रहा था। संगठन में इस टूट की वजह थी संगबिजित का दाईमैरी की सोच को मानने से इंकार करना। दाईमैरी सरकार के साथ शांति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता था।

ISI की सुरक्षा में संगबिजित

दाईमैरी ने सरकार के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अपनी शाखा को भी बढ़ा दिया। सरकार की ओर से कई वर्षों की शांति प्रक्रिया की सारी कोशिशें जब असफल हो रही थीं तो इस मौके ने उसके चेहरे पर मुस्‍कुराहट लाने का काम किया था लेकिन संगबिजित ने उसमें रुकावट डाल दी थी।

संगबिजित फिलहाल म्‍यांमार में है और उसे यहां पर शरण मिली हुई है। उल्‍फा को स्‍पांसर करने वाली आईएसआई संगबिजित को भी सुरक्षा दे रही है। शांति प्रक्रिया में बाधा डालने के अलावा संगबिजित का पहला मकसद असम में मंगलवार की ही तरह आतंकी कार्रवाई को अंजाम देना है।

निर्दोषों की हत्‍या करना और शांति की कोई भी कोशिश सफल न होने देने के मकसद से ही संगबिजित आगे बढ़ रहा है। असम में हत्‍याओं के अलावा अपहरण और ब्‍लास्‍ट की जिम्‍मेदारी भी संगबिजित ने ले रखी है।

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