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Gujarat election 2017: आखिर कैसे हुआ राहुल गांधी का ‘मेकओवर'

नई दिल्ली। गुजरात चुनाव में राहुल गांधी नए रूप में दिख रहे हैं और उनकी पार्टी भी अपनी पुरानी छवि तोड़ने में जुटी है। आखिर क्या वजह है कि राहुल गांधी के तेवर-कलेवर बदल रहे हैं और साथ ही उनकी पार्टी का पुराना रवैया टूटता नजर आ रहा है। यही वजह है कि एक वक्त तक विरोधी उनका मजाक उड़ा कर तवज्जो नहीं देते थे पर अब हालात बदले हैं और गुजरात में जिस तरह उनका कमबैक हुआ है उससे विरोधी भी गंभीर हो गए हैं। यदि आप उनके अभी तक के गुजरात दौरों पर नजर डालें, सोशल मीडिया पर उनके तेवरों पर नजर डालें, उनके भाषणों पर नजर डालें और उनके अंदाज पर नजर डालें, तो पुराने राहुल गांधी और आज के राहुल गांधी में बड़ा फर्क नजर आएगा। आखिर ये मेकओवर कैसे हो रहा है और किस तरह से हो रहा है जिससे उनकी राजनीति पहले से परिपक्व होती दिख रही है।

गुजरात में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है

गुजरात में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है

गुजरात में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है, उसे केवल पाने के लिए प्रयास करना है। चुनाव में बीजेपी को कांग्रेस पटखनी दे पाएगी, ये तो फिलहाल कहना मुश्किल है लेकिन पहली बार ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस गुजरात में चुनाव लड़ रही है और राहुल गांधी पसीना बहाते नजर आ रहे हैं। उनके जितने धुआंधार दौरे हुए हैं, जिस तरह से वो जुमले बाजी कर रहे हैं और जिस तरह मंदिर में मत्था टेकने, ढाबे पर खाना खाने और युवती के साथ सेल्फी खिंचवाने का आनंद ले रहे हैं, उससे ये तो दिख रहा है कि तमाम पराजयों को झेलने के बाद एक बार फिर आत्मविश्वास लौटा है।

लोगों के मन की बात सुन रहे हैं राहुल

लोगों के मन की बात सुन रहे हैं राहुल

दरअसल इसकी शुरूआत राहुल गांधी के अमेरिकी दौरे से हुई थी। ये दौरा सितंबर महीने में हुआ था और तब कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में उनका व्याख्यान हुआ था। 1949 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस यूनिवर्सिटी को संबोधित किया था। यूनिवर्सिटी में उनका भाषण सुर्खियों में छाया और पहली बार लगा कि राहुल गांधी जिन्हें विरोधी राजनीति में बच्चा समझ रहे हैं, वो अब परिपक्व हो रहा है। इस दौरे की अहम भूमिका में थे सैम पित्रोदा। आज यही सैम पित्रोदा गुजरात के चुनाव में उनके साथ हैं और तकनीकी रणनीति के शिल्पकार भी। 75 साल के हो चुके सैम पित्रौदा भारत में दूरसंचार क्रांति के जनक माने जाते हैं और राजीव गांधी के करीबी रहे हैं। अब वो राहुल गांधी के साथ कदमताल कर रहे हैं। पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र की जिम्मेदारी उन पर है और इसके लिए वे गुजरात के कई शहरों का दौरा कर रहे हैं। लोगों के मन की बात सुन रहे हैं, समझ रहे हैं और उसी फीडबैक के जरिए पार्टी अपना घोषणा पत्र तैयार करेगी। यही फीडबैक राहुल गांधी को दिया जा रहा है।

राहुल जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बता रहे हैं

राहुल जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बता रहे हैं

पार्टी नोटबंदी और जीएसटी को बड़ा मुद्दा मानकर चल रही है क्योंकि राज्य में व्यापारी तबका बड़ी तादाद में है। इसीलिए राहुल गांधी हर सभा में बीजेपी को उद्योगपतियों की सरकार करार दे रहे हैं। जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बता रहे हैं। यही वजह है कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और पी.चिदंबरम को आर्थिक मुद्दों पर पार्टी की राय रखने का जिम्मा सौंपा गया है। राजनीतिक रणनीति की जिम्मेदारी अहमद पटेल और अशोक गहलोत देख रहे हैं। ये खास टीम हैं जिसकी राय-मशविरे से उनके अंदाज बदले दिख रहे हैं।

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