Caste Census report पर फंस गई कांग्रेस, जानिए कर्नाटक में पार्टी क्यों हुई दो फाड़?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का अभी सबसे बड़ा राजनीतिक एजेंडा जातिगत जनगणना है। पांचों राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार के दौरान वह यह कहते रहे हैं कि बस एक बार कांग्रेस को फिर से मौका मिल जाए और जाति के आधार पर जनगणना होकर रहेगा।
राहुल ने शुरू में 'जितनी आबादी, उतना हक' वाला नारा भी जोर-शोर से उठाना शुरू किया था। हालांकि, संभवत: दक्षिण भारतीय राज्यों में इसके बैकफायर करने की आशंका के चलते उनका टोन इसपर नरम हो चुका है।

कर्नाटक में जातिगत जनगणना पर बुरी फंसी कांग्रेस
लेकिन, कर्नाटक में विडंबना ये है कि वहां कांग्रेस सरकार यह जातिगत जनगणना करवा चुकी है। फिर भी उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने में अब उसके हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
वोक्कालिगरा संघ की वायरल चिट्ठी से उड़े कांग्रेस के होश
चर्चा थी कि राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया गुरुवार को ही राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की जाति जनगणना रिपोर्ट स्वीकार करेंगे और कैबिनेट के सामने रखेंगे। लेकिन, उससे पहले ही वोक्कालिगरा संघ का एक ज्ञापन वायरल हो गया, जिससे कांग्रेस सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़ गए।
वोक्कालिगा होने की वजह से मैं समाज के साथ भी खड़ा हूं- शिवकुमार
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को भेजी चिट्ठी में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट को खारिज करने की मांग की गई है, जिसपर खुद राज्य के प्रभावशाली उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
इस ज्ञापन पर प्रदेश के वोक्कालिगा समाज के तमाम बड़े नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कांग्रेस के कई और मंत्री के साथ-साथ विधायक भी शामिल हैं।
हालांकि, सीएम का कहना है कि उन्हें पता नहीं कि ज्ञापन पर उनके डिप्टी के भी हस्ताक्षर हैं, लेकिन शिवकुमार का कहना है, 'हां, मैंने इसपर हस्ताक्षर किए हैं। जाति जनगणना कराना मेरी पार्टी का फैसला है। मैं इससे बंधा हुआ हूं। वहीं मेरे समुदाय (वोक्कालिगा) को जनगणना को लेकर कुछ आशंकाएं और चिंताएं भी हैं। वोक्कालिगा होने की वजह से मैं समाज के साथ भी खड़ा हूं। इसमें गलत क्या है?'
प्रदेश के कई दिग्गज रिपोर्ट सार्वजनिक करने के खिलाफ
जातीय जनगणना की रिपोर्ट को ठुकराने की मांग करने वाली जो चिट्ठी मुख्यमंत्री को भेजी गई है, उनमें कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, पूर्व सीएम एसएम कृष्णा, डीवी सदानंद गौड़ा और एचडी कुमारस्वामी, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे और विधानसभा में विरोधी दल के नेता आर अशोक भी शामिल हैं।
दरअसल, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के मौजूदा अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है। माना जा रहा था कि वे 24 नवंबर को रिपोर्ट सरकार को सौंप देंगे। वह कुछ महीने पहले खुद भी यह बात कह चुके थे।
लेकिन, सीएम सिद्दारमैया ने अचानक यह कहकर चौंका दिया कि 'हेगड़े ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुछ और समय का अनुरोध किया है। इसलिए, हमने उन्हें एक्सटेंशन दिया है।' जबकि, एक दिन पहले उन्होंने एक्स पर जो पोस्ट डाला था, उससे लग रहा था कि उन्हें रिपोर्ट सौंपी जाने वाली है।
उन्होंने लिखा था, 'मैं अपने नेता राहुल गांधी के स्टैंड का पूरा समर्थन करता हूं, जिन पर हमें गर्व है। एक राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना होनी चाहिए, जिसके आधार पर सभी के लिए समान हिस्सेदारी और एक समान जीवन होना चाहिए, जो स्वतंत्रता आंदोलन से हमारे आदर्शों को पूरा करने की कुंजी रही है....'
लिंगायत और वोक्कालिगा बिगड़े तो कांग्रेस को हो सकता है खेल!
जानकारों की मानें तो जाति जनगणना के जो कुछ आंकड़े कथित तौर पर लीक हुए हैं, उसने कांग्रेस सरकार की होश उड़ा रखी है।
इसके मुताबिक इस रपोर्ट में लिंगायतों की जनसंख्या 14% और वोक्कालिगा की 11% बताई गई है। कर्नाटक में यह दोनों ही जातियां सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक तौर पर सबसे ज्यादा दबंग मानी जाती हैं।
परंपरागत तौर पर राज्य में इनकी आबादी को लेकर यह धारणा बनी हुई है कि लिंगायतों की आबादी 17% और वोक्कालिगा की 13% है। जाहिर है कि अगर रिपोर्ट में इनकी गिनती कम बताई गई तो यह कांग्रेस के सारे मंसूबों की हवा निकाल सकता है।
ऊपर से यह भी दावा किया जा रहा है कि रिपोर्ट से जुड़े कई दस्तावेज गायब हैं। हालांकि, आयोग की ओर से इसका खंडन भी किया जा रहा है कि सारे आंकड़े पुख्ता तौर पर मौजूद हैं।
ओबीसी, दलित और मुस्लिमों की ओर से रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर जोर
लेकिन, पार्टी की मुश्किल ये है कि एक तरफ तो जातिगत जनगणना की रिपोर्ट को जारी करने का विरोध हो रहe है तो दूसरी तरफ ओबीसी, दलित और मुस्लिम नेता और विधायक तत्काल इसे स्वीकार करने और सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। बिहार में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद राज्य सरकार पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।
'सही तरीका यही है कि टालते जाओ......'
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा है, 'कांग्रेस न तो इस रिपोर्ट को रिजेक्ट कर सकती है, क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के स्टैंड के खिलाफ होगा और न ही इसे स्वीकार किया जा सकता है, क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा कदम आत्मघाती होगा, क्योंकि दो प्रमुख समुदाय इसके विरोध में हैं। सही तरीका यही है कि टालते जाओ......'












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