प्रोन्नति मामला: वीके सिंह ने सुहाग के खिलाफ एक्शन सही ठहराया

पार्टी का कहना है कि सेना उप प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग के प्रमोशन के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में एनडीए सरकार का हलफनामा सिंह में अविश्वास का प्रतीक है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘ये मंत्री मंत्रिपरिषद में नहीं बने रह सकते। ये तय करना है कि उन्हें हटाया जाए या फिर वह इस्तीफा दें।'
गौरतलब है कि वीके सिंह के सेना प्रमुख मनोनीत दलबीर सिंह सुहाग की पदोन्नति पर रोक लगाने के निर्णय को ‘अवैध' करार दिये जाने के बाद अब केंद्रीय मंत्री सिंह ने अपने कदम को उचित ठहराया है।
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सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ‘यदि कोई यूनिट बेगुनाहों की हत्या करती है, लूटपाट करती है और उसके बाद संगठन का प्रमुख उन्हें बचाने का प्रयास करता है, तो क्या उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए? अपराधियों को खुला घूमने दिया जाए?'
रक्षा मंत्रालय ने लेफ्टिनेंट जनरल रवि दस्ताने से संबंधित पदोन्नति मामले में हाल में दायर एक हलफनामे में कहा है कि सुहाग के खिलाफ अनुशासनात्मक रोक के लिए जिन खामियों को आधार बनाया गया वे ‘जानबूझकर', ‘अस्पष्ट' और ‘अवैध' थीं।
पूर्व सेना प्रमुख की यह टिप्पणी उस खबर की पृष्ठभूमि में आयी है कि लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सुहाग के नेतृत्व वाली एक यूनिट ने कथित तौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र में हत्याएं और लूटपाट की थीं।
वहीं वी के सिंह ने एक अन्य ट्विट में सिंघवी पर हमला बोला और कहा, ‘छाज तो बोले तो बोले वो छलनी क्या बोले जिसमें 1800 छेद हैं।' इस बीच रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने जनरल सिंह द्वारा सुहाग पर अनुशासनात्मक और सतर्कता प्रतिबंध लगाने से संबंधित इस मुद्दे पर अपने पूर्व के रुख का पालन किया है।
पूर्व सैन्य प्रमुख वीके सिंह का उनकी जन्म तिथि को लेकर पूर्व की यूपीए-2 सरकार के साथ खासा विवाद हुआ था। एक पखवाड़े पहले बनी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के वह ऐसे पहले मंत्री हैं, जिनका विपक्ष ने इस्तीफा मांगा है। हालांकि मामला तूल पकड़ता जा रह है, जिससे निपटने की राह सिंह के लिए मुश्िकल दिख रही है।












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