मल्लिकार्जुन खड़गे को शशि थरूर का जवाब, बताया- आखिर वह क्यों लड़ना चाहते हैं
नई दिल्ली, 03 अक्टूबर। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है। सीधे तौर पर माना जा रहा है कि यह मुकाबला शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच है। अध्यक्ष पद के लिए सबसे पहला नाम जो सामने आया था वह शशि थरूर था। इसके बाद पहले अशोक गहलोत, फिर दिग्विजय सिंह और अंत में आखिरी समय पर मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सामने आया। इस बीच शशि थरूर ने इस चुनाव को पार्टी के भीतर की प्रतिस्पर्धा नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा पार्टी के भीतर की नहीं है बल्कि यह पार्टी के सदस्यों के लिए एक मौका है कि वह प्रभावी रूप से यह चुनें कि कैसे भारतीय जनता पार्टी का सामना किया जाए।
Recommended Video

खड़गे-थरूर के बीच मुकाबला
माना जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार की पसंद हैं, ऐसे में खड़गे का इस चुनाव में जीतना भी तय माना जा रहा है। लेकिन शशि थरूर बावजूद इसके कड़ी प्रतिस्पर्धा देने के मूड में हैं। वहीं खड़गे ने नामांकन के बाद कहा कि मैंने शशि थरूर से बात की है और मैंने उनसे कहा है कि बेहतर होगा अगर सर्वसहमति से उम्मीदवार का चयन हो। लेकिन शशि थरूर ने साफ कर दिया है कि प्रतिस्पर्धा हो तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जब प्रतियोगी लड़ने का फैसला करता है तो मैं उसे रोक नहीं सकता हूं। वह लड़ रहे हैं, वह मेरे छोटे भाई हैं, यह परिवार के अंदर का मामला है, हमे आज और कल एकजुट रहने की जरूरत है।

थरूर ने तस्वीर को किया साफ
शशि थरूर ने ट्वीट करके लिखा, मुझे यह साफ करना है कि मैं खड़गे जी से इस बात पर सहमत हूं कि हम सभी कांग्रेस के सदस्य इस बात को लेकर सहमत हैं कि कांग्रेस को भाजपा का सामना करना है, ना कि एक दूसरे का। हमारे बीच कोई सैद्धांति मतभेद नहीं है। हमारे वोट करने वाले सहयोगियों की पसंद 17 अक्टूबर को सामने आ जाएगी, यह वोटिंग सिर्फ इसलिए होगी कि कैसे भाजपा का प्रभावी तरीके से सामना किया जाए। शशि थरूर ने अपने चुनावी प्रचार में कहा कि कांग्रेस में बदलाव की जरूरत है और खड़गे के नामांकन से पहले की ही स्थिति बनी रहेगी और यथास्थिति बरकरार रहेगी।

सियासी ड्रामा
गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में काफी ड्रामा देखने को मिला। पहले माना जा रहा था कि शशि थरूर के खिलाफ अशोक गहलोत मैदान में उतर सकते हैं क्योंकि वह गांधी परिवार के काफी करीबी हैं। लेकिन राजस्थान में जिस तरह से पार्टी के विधायकों ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कांग्रेस की एक पद एक व्यक्ति की नीति का विरोध किया उसके बाद अशोक पायलट ने अपना नाम वापस ले लिया, यही नहीं उन्होंने राजस्थान के पूरे घटनाक्रम के लिए माफी तक मांगी।












Click it and Unblock the Notifications