Congress Voters Hunt: कांग्रेस को है उनकी तलाश, जो उसे अपना बहुमूल्य वोट दे सके!

बंगलुरू। 100 वर्ष से अधिक पुरानी इंडियन नेशनल कांग्रेस आज अपने वजूद को लेकर जद्दोजहद में हैं और कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि कांग्रेस को आगामी विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को वोट कर सकने वाले वोटरों की पहचान कर लेनी चाहिए। चुनाव दर चुनाव हर का मुंह देख चुकी कांग्रेस को 2019 लोकसभा चुनाव में एक बार फिर बुरी हार का सामना करना पड़ा था।

Gandhi family

हालांकि पार्टी को 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार कम फजीहत का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस मुक्त भारत के सपने के साथ चुनाव दर चुनाव कांग्रेस पार्टी के वजूद को मिटाने पर आतुर बीजेपी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में उन किलों को भेदने में सफल रही है, जिससे कभी पूरे देश में शासन करने वाली कांग्रेस आज महज 5 राज्यों में सिमट कर रह गई है। ऐसे में कांग्रेस नेता शशि थरूर का सवाल कांग्रेस के लिए लाजिमी हो चला है।

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कांग्रेस पार्टी के पतन की शुरूआत का समय पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व काल से शुरू हुआ और वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान जब पार्टी ने बीजेपी के पीएम पद उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुंठित प्रचार-प्रसार करना शुरू किया तो हार का सिलसिला थम ही नहीं रहा है। गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की मौजूदा अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा दिए गए 'मौत का सौदागर' और 'खून की दलाली' जैसे बयानों ने बीजेपी की राह न केवल गुजरात के आसान कर दी है, बल्कि मोदी-शाह की जोड़ी के लिए केंद्र की सत्ता के करीब पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान किया।

राष्ट्रवाद के नारे पर सवार बीजेपी के सामने कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर धाराशाई हुई। यहां तक कि उसके कोर वोटर छिटक कर बीजेपी के पास चले गए। इसके पीछे बीजेपी की राष्ट्रवादी राजनीति को जोर और बहुसंख्यक हिंदुओं को मुद्दों को उठाना प्रमुख कारण था और तब से खाली हुआ कांग्रेस का हाथ आज भी खाली ही है।

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कांग्रेस को उसके वोटरों की पहचान करने की सलाह देने वाले शशि थरूर जानते हैं कि कांग्रेस का कोर वोटर पूरी तरह से बिखर चुका है। 2014 लोकसभा चुनाव और हाल ही में हुए 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत और कांग्रेस समेत सपा, बसपा और अन्य विपक्षी पार्टियों की पराजय इसके सबूत हैं। कांग्रेस के पास अभी खोने के लिए कुछ नहीं है।

शायद यही कारण है कि शशि थरूर कांग्रेस के आलाकमान नेताओं को आत्ममंथन की सलाह दे रहे हैं। यूपी के सहारे केंद्र की सत्ता में पहुंचने की सीढ़ी को बहुत दूर छोड़ चुकी कांग्रेस को अब दोबारा यूपी में अपनी पैठ बनाने में कम से कम अगले चार साल कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, क्योंकि कांग्रेस की गढ़ रही अमेठी जहां अब उसके हाथ से निकल चुकी है। वहीं, रायबरेली सीट से सोनिया गांधी को जीत दर्ज करने में लोहे के चने चबाने पड़ गए थे।

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हालांकि कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनाई गईं सोनिया गांधी का अभी पूरा फोकस 3 विधानसभा में होने वाले आगामी चुनावों पर हैं। इनमें महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के प्रदेश शामिल है, जहां अभी बीजेपी और एनडीए की सरकार है और ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी अकेले दम पर हरियाणा और झारखंड में चुनाव आसानी से जीत लेगी जबकि महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना की गठबंधन को हराने का दम कांग्रेस में नहीं बचा है।

कांग्रेस की हालत 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी पतली हैं, जहां लड़ाई सिर्फ और सिर्फ बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच मानी जा रही है, क्योंकि शीला दीक्षित के देहावसान के बाद पार्टी के पास दिल्ली का चेहरा बनाने के लिए अजय माकन को छोड़कर कोई नेता नहीं हैं और अजय माकन अपने दम पर कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में काफी नहीं हैं।

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दरअसल, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने उक्त बयान इस बात से आहत होकर दिया है, जिसमें उनके ही पार्टी के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में दिए गए उनके बयानों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। हाल ही में शशि थरूर ने पार्टी नेता जयराम रमेश की एक टिप्पणी का समर्थन किया था, जिसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने शशि थरूर को तलब कर लिया था। रमेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमेशा खलनायक की तरह पेश करने से पार्टी को कुछ हासिल नहीं होगा।

बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में एनएसयूआई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए शशि थरूर ने कहा कि उन्हें एक उदाहरण कोई दे दे कि उन्होंने कब मोदी सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में आई खबरों की समस्या यह है कि ये पूरी तरह निराधार होती हैं और जब मीडिया यह कहता है कि उन्होंने मोदी की तारीफ की है तो इससे वो व्यथित हो जाते हैं।

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जयराम रमेश के बयान पर अपनी टिप्पणी को याद करते हुए थरूर बोले, 'मैंने यह कहा था कि हमारा सिद्धांत यह समझने का होना चाहिए कि लोगों ने मोदी जी के लिए वोट क्यों किया, क्योंकि कांग्रेस को 2014 लोकसभा चुनाव मे महज 19 फीसदी वोट मिला और 2019 में भी 19 फीसदी वोट ही क्यों मिला जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 2014 में 31 फीसदी वोट मिला था और 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी 37 फीसदी वोट हासिल करने में कामयाब हो गई। थरूर ने कहा कि कांग्रेस को उन लोगों को फिर से अपनी ओर खींचना होगा जो किन्हीं कारणों से कांग्रेस के बजाय भाजपा को वोट करने लगे हैं।

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गौरतलब है कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था पीएम मोदी की सरकार का मॉडल 'पूरी तरह नकारात्मक गाथा' नहीं है और उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करना और पार्टी नेताओं को हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। रमेश ने यह भी कहा था कि यह वक्त है कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझे, जिसके कारण वह सत्ता में लौटे, क्योंकि उन्हीं कारणों से 37 फीसदी मतदाताओं ने वोट देकर सत्ता में दोबारा उनकी वापसी करवाई।

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