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कांग्रेस ने न्याय देने वाली देश की सर्वोच्च संस्था पर आघात किया है: मीनाक्षी लेखी

मीनाक्षी लेखी ने कहा ' मैं उप राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगी जिन्होंने गहन सोच विचार किया और विस्तृत आदेश दिया

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने संबंधी कांग्रेस तथा अन्य दलों की ओर से दिए गए महाभियोग प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। जिसके बाद कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही है वहीं कांग्रेस ने नेता बीजेपी को निशाने पर ले रहे हैं। इसी बीच बीजेपी की तरफ से सांसद मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस को जवाब दिया है। मीनाक्षी लेखी ने प्रेस कॉन्फेंस कर कहा कि कांग्रेस ने इस बार किसी व्यक्ति पर नहीं बल्कि न्याय देने वाली देश की सर्वोच्च संस्था पर आघात किया है। मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य है 'हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी साथ ले डूबेंगे'।

कांग्रेस ने न्याय देने वाली देश की सर्वोच्च संस्था पर आघात किया है: मीनाक्षी लेखी

मीनाक्षी लेखी ने कहा ' मैं उप राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगी जिन्होंने गहन सोच विचार किया और विस्तृत आदेश दिया। दूसरा पहलू शिकायत से ही जुड़ा हुआ है। यह एक बड़ी गलती है। जिस भाषा में यह लिखा गया है उसमें कहा गया है कि .... ऐसा प्रतीत होता है, .... प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है, .... ऐसा लगता है।' उन्होंने कहा कि इस पर कांग्रेस पार्टी के भीतर ही मतभेद हैं जो यह बताते हैं कि कुछ निजी हित राजनीतिक लाभ के लिए प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वे सत्ता के बाहर हैं।

उधर 'राज्यसभा के सभापति ने महाभियोग प्रस्ताव को शुरूआती स्तर पर ही खारिज कर दिया, जो अभूतपूर्व है।' यह बात कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट में वकील कपिल सिबब्ल ने आज एक प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि 'भारत के इतिहास में पहली बार, संसद के सदस्यों की ओर से दिए महाभियोग प्रस्तवा पर चर्चा भी नहीं हुई।' सिब्बल ने कहा कि 'अगर 50 राज्यसभा के सदस्य महाभियोग का प्रस्ताव लाते हैं, तो प्रस्ताव को सभापति द्वारा निपटाया जाना उनके न्यायिक या अर्ध न्यायिक क्षमता में नहीं है।' उन्होंने कहा कि 'महाभियोग सरीखे प्रस्तावों को जल्दीबाजी में नहीं निपटाया जाता। प्रस्ताव लाना हमारा अधिकार है।' सिब्बल ने कहा कि 'बिना पर्याप्त सलाह के फैसला लिया गया है।' उन्होंने कहा कि 'यह आदेश गैरकानूनी है।' सिब्बल ने कहा कि 'हम उनके फैसले को चुनौती देने के लिए निश्चित तौर पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।'

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