संसद में बहस हो या हंगामा, पूछिए कांग्रेस से
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) संसद के मानसून सत्र का श्रीगणेश मंगलवार को जिस रूप में हुआ है उससे साफ है कि इस बार के संसद सत्र में हंगामे, विवाद, बॉयकाट जैसे हालात बने रहेंगे। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ठान सा लिया है कि वे संसद का काम नहीं होने देंगे। व्यवधान खड़े करेंगे।
कांग्रेस मंगलवार को राज्यसभा में ललित मोदी के मसले को उठाने पर आमादा थी। इसके जवाब में भाजपा नेता अरुण जेटली को कहना पड़ा कि कांग्रेस सदन को चलने देने के लिए तैयार ही नहीं है। यानी संसद का कामकाज ना हो, यही कांग्रेस की चाहत है।
बहस से दूर कांग्रेस
बेशक, बेहतर तो ये होगा संसद चले, वहां पर स्वस्थ बहस हो तथा आवश्यक विधायी कार्य हों। हालांकि इस बात की उम्मीद कम लगती है। कारण, संसद चलाने से ज्यादा कांग्रेस उसे ठप रखना चाहती है। उसे तो कुछ बड़े नेताओं के इस्तीफों के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा।
नहीं झुकेगी सरकार
दरअसल ललित मोदी कांड में विपक्ष या कहें कि मुख्य रूप से कांग्रेस विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस्तीफा मांग रहा है। सरकार उनकी मांग को मानने के लिए तैयार नहीं है।
संसद में भिड़ेंगे, बाहर गले मिलेंगे
धूल चाटेंगे बिल
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन जिस तरह की कटुता सदन में दिखी उससे साफ है कि कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी रहेगी। नतीजा ये होगा कि सदन ठप रहेगा। अहम बिल धूल चाटते रहेंगे। जिनमें भूमि अधिग्रहण बिल खास है।
कांग्रेस की तरफ से बहस का नेतृत्व आनंद शर्मा कर रहे थे। वे जब आरोपों की झड़ी लगा रहे थे तब जेटली को कहना पड़ा कि विपक्ष बहस शुरू करे। सुषमा स्वराज बहस का जवाब देंगी। पर विपक्ष स्वस्थ बहस के लिए तैयार ही कहा था।
हालांकि स्वराज ने ट्वीट करके कहा कि वह बहस के लिए तैयार हैं।
किसे देश चिंता
बहरहाल, आज की सदन कार्यवाही से साफ है कि संसद में विरोधी होने का मतलब ही अपना अहसास करवाना रह गया चाहे अनुचित ही क्यों न हो, देश हित की चिंता किसको है, ना बहस करेंगे न जवाब सुनेंगे। सिर्फ इस्तीफा।
मतलब विपक्ष सिर्फ नाक की लड़ाई के लिए अहँकार की पराकाष्ठा है ये। जनता के साथ अन्याय है। जनता क्या सोचेगी की बिना सफाई का मौका दिए सिर्फ इस्तीफे की जिद्द, कानूनन भी गलत है और जनता के पैसों का दुरूपयोग है!
गद्दारी जनता के साथ
वरिष्ठ टिप्पणीकार अरुण कुमार कहते हैं कि कांग्रेस नकारात्मक व दिशाहीन राजनीति कर रही है। जिस विषय को जनता के बीच उठाया जाना चाहिए या न्यायालयों में चुनौती दी जानी चाहिए उस विषय पर संसद को ठप कर देना उचित नहीं है।यह जनता के साथ गद्दारी है ।जनता की गाढ़ी कमाई से संसद चलती है। किसी के पैतृक संपत्ति से नहीं।













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