मिर्च, नींबू, नारियल से अगर राफेल की रक्षा होगी, तो उसे क्यों खरीदा: उदित राज
नई दिल्ली। फ्रांस सरकार से राफेल डील को लेकर कांग्रेस सरकार ने लगातार केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। लेकिन जिस तरह से राफेल की पहली खेप को आधिकारिक रूप से रिसीव करने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस पहुंचे और उन्होंने इसकी शस्त्र पूजा की उसके बाद इसपर लगातार विवाद हो रहा है। तमाम विपक्षी दल के नेता राजनाथ सिंह पर शस्त्र पूजा करने को लेकर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे तमाशा बताया था, जबकि कांग्रेस के दूसरे नेता उदित राज ने सवाल पूछा है कि आखिर राफेल खरीदा ही क्यों हैं।

नींबू, मिर्च, नारियल से कर लेते रक्षा
उदित राज ने राफेल की पूजा करने पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश का रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार संविधान के तहत चलती है। इसका कोई धर्म नहीं है। मिर्च नींबू और नारियल से पूजा के साथ या बाद राफेल को एयरफोर्स में शामिल किया गया है। इसका क्या मतलब है, बिना अंधविश्वास के यह नींबू, मिर्च और नारियल की ताकत से यह सफल नहीं हो सकता है, अगर मिर्च, नींबू और नारियल में ही इतनी ताकत है तो राफेल खरीदा ही क्यों। मिर्च, नींबू और नारियल से ही राफेल की रक्षा होगी तो इसी से रक्षा कर लीजिए।
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क्या ऐसे होगा वैज्ञानिक सोच का विकास
उदित रात ने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि जो शिक्षक हैं, वैज्ञानिक हैं, छात्र हैं, उनपर क्या असर पड़ेगा। क्या इस देश के अंदर वैज्ञानिक सोच विकसित हो पाएगी, क्या हम तकनी और शोध कर पाएंगे। क्या दुनिया के नजर में हमारी हंसी नहीं होगी। यह काम करके हम विज्ञान और तकनीक का गलत विश्लेषण कर रहे हैं। यही कारण है कि हम शोध नहीं कर पाए, हम चाहते हैं कि वैज्ञानिक सोच का विकास हो।

खड़गे ने बताया था तमाशा
इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने राफेल की शस्त्र पूजा को तमाशा करार देते हुए कहा था कि नकी पार्टी ने जब बोफोर्स तोप खरीदी थी तो यह सब दिखावा नहीं किया था। कोई भी उसे खरीदने और लाने के लिए नहीं गया था, हमने कोई दिखावा नहीं किया था। राफेल को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारतीय वायुसेना के अधिकारी इस बात की पुष्टि करेंगे कि राफेल अच्छे हैं या नहीं। ये लोग वहां जाते हैं और एयरक्राफ्ट के भीतर बैठकर दिखावा करते हैं। बता दें कि 36 राफेल एयरक्राफ्ट की डील 23 सितंबर 2016 को हुई थी, यह करार भारत सरकार और फ्रांस सरकार के बीच हुआ था।












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