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Shivraj Patil ने 26/11 पर क्यों त्याग दिया था पद? दिलचस्प है सांइस स्टूडेट से लेकर गृह मंत्री तक का सफर

Shivraj Patil Political Journey: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का आज 12 दिसंबर, 2025 को निधन हो गया। उन्होंने 90 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। पाटिल का सुबह करीब 6:30 बजे लातूर में निधन हो गया। वे लंबी बीमारी के कारण घर पर ही देखरेख में थे।

लगभग चार दशकों से अधिक के अपने शानदार और प्रभावशाली राजनीतिक करियर के लिए जाने जाने वाले पाटिल एक ऐसे सम्मानित सांसद थे, जिनकी पहचान उनके शांत, गरिमामयी आचरण और संवैधानिक ज्ञान के कारण थी।

Shivraj Patil Biography

Shivraj Patil Education: कितने पढ़े-लिखे हैं शिवराज पाटिल?
शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर, 1935 को महाराष्ट्र के लातूर जिले के चाकूर गांव में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन (B.Sc.) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से कानून (LLB) की डिग्री हासिल की और अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने से पहले एक वकील के रूप में अभ्यास किया।

कृषि और सामाजिक कार्यों में थी गहरी रुचि
राजनीति के अलावा, शिवराज पाटिल बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्हें कृषि और सामाजिक कार्यों में गहरी रुचि थी। अपने खाली समय में वे पढ़ने, चित्रकला (पेंटिंग), तैराकी, घुड़सवारी और शूटिंग का आनंद लेते थे। उनका ज्ञान और अनुभव उनकी लेखनी में भी झलकता था; उन्होंने अपने अनुभवों और जीवन दृष्टि पर आधारित चार पुस्तकें भी लिखीं।

Shivraj Patil Political Journey: शिवराज पाटिल का राजनीतिक करियर
शिवराज पाटिल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत स्थानीय स्तर से की, जहां उन्होंने लातूर नगर परिषद के प्रमुख के रूप में कार्य किया। इस शुरुआती अनुभव ने उन्हें राज्य की राजनीति में मजबूत नींव बनाने में मदद की। 1972 से 1980 तक उन्होंने दो कार्यकाल के लिए महाराष्ट्र विधान सभा में विधायक के रूप में कार्य किया और इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी आसीन रहे।

लोकसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल में भूमिका
साल 1980 में, शिवराज पाटिल लातूर से लोकसभा के लिए चुने गए और लगातार सात कार्यकाल तक सांसद रहे। राष्ट्रीय स्तर पर, उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में विभिन्न मंत्रालयों, जैसे रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनकी पहचान एक मेहनती, सुलझे हुए और स्पष्टवादी नेता के रूप में थी।

लोकसभा अध्यक्ष के रूप में योगदान
पाटिल 1991 से 1996 तक 10वें लोकसभा अध्यक्ष रहे। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण दौर था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने संसदीय प्रणाली को आधुनिक बनाने में अतुलनीय योगदान दिया, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण था सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण (Live Telecasting) शुरू करना। उन्होंने संसद पुस्तकालय भवन के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केंद्रीय गृह मंत्री और 26/11 के बाद इस्तीफा
2004 में, उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया और वे राज्यसभा के लिए चुने गए। हालाँकि, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11) के बाद देश में सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।

राज्यपाल और अंतिम सफर
केंद्रीय राजनीति से हटने के बाद भी उन्होंने देश की सेवा जारी रखी। 2010 से 2015 तक, उन्होंने पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में कार्य किया। अपनी मृत्यु के समय, उनकी संपत्ति 2009 के हलफनामे के अनुसार ₹4 करोड़ से अधिक सूचीबद्ध थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी विजया पाटिल, उनके पुत्र शैलेश पाटिल और पुत्री हैं। 12 दिसंबर, 2025 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, और वे अपनी गरिमामयी राजनीतिक विरासत पीछे छोड़ गए।

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