द्रौपदी मूर्मु को लेकर दिग्गज कांग्रेस नेता के बिगड़े बोले, कहा- 'वो आदिवासियों की प्रतीक नहीं बल्कि...'
कांग्रेस नेता अजय कुमार ने एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर बयान देते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू 'एविल फिलोस्फी ऑफ इंडिया' यानी दुष्ट विचारधारा से संबंध रखत
नई दिल्ली, 13 जुलाई : कांग्रेस नेता अजय कुमार ने एनडीए के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर बयान देते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू 'एविल फिलोस्फी ऑफ इंडिया' यानी बुराई की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन्हें आदिवासियों का प्रतीक नहीं मानना चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि अनुसूचित जातियों की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। इसको लेकर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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इन विचारों से रखती हैं संबंध
कांग्रेस नेता अजय कुमार ने कहा कि रामनाथ कोविंद हमारे राष्ट्रपति हैं, लेकिन जब हाथरस कांड हुआ तो क्या उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा। अनुसूचित जातियों की स्थिति बदतर हो चुकी है। द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी का प्रतीक नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि वे बुराई की विचारधारा से संबंध रखती हैं।

यशवंत सिन्हा को देना चाहिए वोट
राष्ट्रपति चुनाव को 'राष्ट्र की आत्मा' की लड़ाई बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी समान विचारधारा वाली पार्टियों को विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रतीक बनाना और भारत की जनता को बेवकूफ बनाना ही मोदी सरकार है। यह देश की आत्मा की लड़ाई है और सभी समान विचारधारा वाले दलों को यशवंत सिन्हा को वोट देना चाहिए।

बीजेपी ने किया पलटवार
अजय कुमार पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का अपमान किया है। बता दें कि निर्वाचित होने पर द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी।

संघर्षपूर्ण रहा है द्रौपदी मुर्मू का जीवन
वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल 2015 से 2021 तक रहीं। ओडिशा के एक पिछड़े जिले मयूरभंज के एक गरीब आदिवासी परिवार में जन्मी मुर्मू ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की।

ऐसा है सफर
द्रौपदी मुर्मू 2013 से 2015 तक भाजपा के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य थीं और 2010 और 2013 में मयूरभंज (पश्चिम) के भाजपा जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। 2006 और 2009 के बीच वह ओडिशा में भाजपा के एसटी मोर्चा की प्रमुख थीं। वह 2002 से 2009 तक भाजपा एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य रहीं।
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