साइकिल से प्रचार करने वाले इस कांग्रेसी को यूपी में सौंपी जाएगी पार्टी की कमान

बेंगलुरु। उत्तर प्रदेश में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस पार्टी में नयी जान डालने में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी जुटी हुई हैं। पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करने के लिए लंबे समय से वह मजबूत कंधे तलाश रहीं हैं। जिसमें सबसे पहली तलाश यूपी कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद के लिए थीं। माना जा रहा है कि उनकी तलाश लगभग पूरी हो चुकी है। पार्टी अजय कुमार लल्लू को पार्टी के अध्‍यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने के मूड में हैं। जिसकी महज औपचारिक घोषणा होनी बाकी रह गयी हैं ।

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बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों के बाद कांग्रेस पार्टी कोमा में चली गयी थी। पार्टी की यह हालत देखकर नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया था। संगठन को दोबारा खोई हुई पहचान दिलाने की जिम्मा महासचिव प्रियंका गांधी ने संभाला है। प्रियंका गांधी ने संगठन के लिए पूर्ण समर्पित कार्यकर्ताओं को ढूंढना आरंभ किया तभी उनकी नजर अजय कुमार लल्लू पर पड़ी। कुशीनगर के सिरोही गांव के मूल निवासी अजय कुमार तमकुही क्षेत्र से विधायक हैं।

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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी ने पूर्वी यूपी के लगभग सभी जनपदों में जनसभाएं कीं। इसके बावजूद कांग्रेस हार गयी और हार का मंथन के बाद प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर दिया। प्रियंका ने इसके बाद ऊर्जावान जुझारु नेताओं और कार्यकर्ताओं की तलाश की। जिसमें सीनियर पदाधिकारियों ने अजय कुमार का नाम सुझाया जो प्रियंका को भी अध्‍यक्ष पद के लिए फिट लग रहे हैं।

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साइकिल से जाते हैं जनता के बीच

अजय कुमार लल्लू वहीं नेता हैं जो जनता के बीच साइकिल से वोट मांगने जाते थे। यूपी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रचार के लिए मीलों दूर तक साइकिल चलाते और एक कार्यकर्ता उनके पीछे करियर पर कांग्रेस का झंडा लिए बैठ रहता। यह कांग्रेस के वो समर्पित और जमीनी नेता है कि वो संगठन के लिए कई कई महीनों तक घर भी नहीं जाते हैं। वह पार्टी के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव वह तमकुही क्षेत्र से जीते हैं। अजय कुमार लल्लू गांधीवादी विचार धारा रखने वाले समाज प्रचारक सुब्बाराव से प्रभावित है । वह सुब्बाराव को अपना गुरू मानते हैं और अपने जीवन का लंबा समय उनके साथ बिताया है । कई वर्षो तक उनके साथ काम किया है उनसे बहुत कुछ सीखा है ।

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शादी भी नहीं की

अजय कुमार ने अपना पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है। उन्‍होंने शादी तक नहीं की है। गरीबों के हक की लड़ाई की वजह से वो कई बार जेल जा चुके हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र में जिला प्रशासन जब सब्‍जी वालों के ठेले हटवा रहा था तब यह धरने पर बैठ गए और आंदोलन छेड़ दिया जिसके बाद अजय कुमार 15 दिनों तक जेल भी गए।

घर से धन लगाकर करते हैं समाजसेवा

साधारण रहन-सहन वाले अजय कुमार दिन रात पार्टी के लिए काम करते हैं। इसलिए पार्टी हाईकमान ने उन्‍हें विधानसभा दल का नेता बना दिया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में अजय कुमार लल्लू और अराधना मिभा ये दो ऐसे नेता थे जो लगातार दोबारा चुनाव जीते थे। लेकिन अजय कुमार को संगठन का अधिक अनुभव है। अजय कुमार छात्र समय से ही राजनीति में हैं उन्‍होंने पार्टी जब जॉइन की तब वह आर्थिक तंगी में थे तब उनके भाई उन्‍हें प्रति माह 5 हजार रुपये देते थे जिससे वो राजनीति करते थे। 2012 तक भाई ऐ पैसे लेकर उन्‍होंने राजनीति में रहकर समाजसेवा की। बता दें 2012 के विधानसभा चुनाव में अजय कुमार ने भाजपा के दिग्गज पूर्व विधायक नन्‍द किशोर मिश्र व समाजवादी पार्टी के दिग्गज पूर्व मंत्री डॉ पी के राय को करारी शिकस्‍त देकर जीत को अपने पाले में किया था।

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