कर्नाटक के बाद कांग्रेस के इस 'नए गठबंधन' ने उड़ाई मोदी-शाह की नींद, दांव पर हैं तीन प्रदेश

नई दिल्ली: कर्नाटक में जिस प्रकार जेडीएस-कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन बीजेपी पर भारी पड़ा है और उसके बाद पूरे विपक्ष ने जिस तरह की एकजुटता दिखाई है, ये आने वाले दिनों में बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बना रहा है और कई मौकों पर ये देखा गया है कि बीजेपी के तमाम विरोधी दल एक मंच पर आने लगे हैं। ऐसे में आगामी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में विपक्षी दल भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

Congress-BSP alliance can be a game changer in MP, Rajasthan, Chhattisgarh trouble for bjp.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन ने चुनाव पूर्व गठबंधन कर कर्नाटक में दो तिहाई सीटों पर जीत हासिल की होती। ये तो कहा नहीं जा सकता कि कांग्रेस ने इस चुनाव से क्या सीख ली है लेकिन कांग्रेस-बीएसपी का चुनाव पूर्व गठबंधन मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में कितना प्रभावी हो सकता है, ये समझने की जरुरत है।

साल 2003 से अबतक, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी-कांग्रेस-बसपा के वोट शेयर की बात करें तो, साल 2008 के राजस्थान चुनाव के अलावा भाजपा ने सभी चुनावों में जीत हासिल की जबकि कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। इन राज्यों में बसपा की सीटें और उनका वोट शेयर काफी कम रहा लेकिन इसपर ध्यान देने की जरूरत है कि बीएसपी-कांग्रेस का साक्षा वोट शेयर 9 में से 6 चुनावों में बीजेपी से अधिक रहा है।

बसपा-कांग्रेस का साझा वोट शेयर बीजेपी पर भारी

बसपा-कांग्रेस का साझा वोट शेयर बीजेपी पर भारी

हालांकि अलग-अलग राज्यों में ये आंकड़ा भी अलग ही रहा है। कांग्रेस और बसपा का साझा वोट शेयर छत्तीसगढ़ में बीजेपी से अधिक रहा है लेकिन राजस्थान और मध्यप्रदेश में हमेशा ऐसा नहीं हुआ है। कांग्रेस को राजस्थान के 2008 चुनाव के अलावा वोट शेयर के मुताबिक सीटें कम ही मिली हैं और ये अनुपात बीजेपी के मुकाबले कम रहा है। बसपा का सीट शेयर और वोट शेयर का अनुपात बीजेपी और कांग्रेस से काफी कम रहा है। पहली बार 1989 में BSP ने लोकसभा चुनाव लड़ा था, 1989 से 1999 के बीच 250 से कम सीटों पर चुनाव लड़ते रहे। लेकिन 2004 में इसमें बदलाव आया और पार्टी ने और भी सीटों पर चुनाव लड़ा।

फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव चुनाव पूर्व गठबंधन सफल रहा

फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव चुनाव पूर्व गठबंधन सफल रहा

यूपी में मिली सफलता ने बसपा को पैन इंडिया लेवल पर चुनाव लड़ने के लिए उत्साहित किया। 2013 में चुनाव आयोग ने भी बीएसपी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे दिया। लेकिन पार्टी को 2014 में शर्मनाक हार झेलनी पड़ी जब 503 में से एक भी सीट पर पार्टी को जीत नहीं मिली। लेकिन हाल ही सपा के साथ में फुलपुर और गोरखपुर उपचुनाव से पहले गठबंधन किया और सपा उम्मीदवार को जीत हासिल हुई।

दलित उत्पीड़न के मुद्दे का भी राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी

दलित उत्पीड़न के मुद्दे का भी राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी

इस वक्त दलित उत्पीड़न का मुद्दा भी राजनीतिक रंग लेता हुआ दिखाई दे रहा है और ऐसे में दलितों की हितैषी कही जाने वाली बीएसपी के साथ कांग्रेस का गठबंधन इनकी सीटों की संख्या बढ़ाने का काम कर सकता है। दलित वोटरों को बसपा की ताकत माना जाता है और बसपा के साथ गठबंधन करने पर इनके वोटर साझेदार पार्टी के पक्ष में वोट ट्रांसफर करते हैं। ऐसा हाल ही में देखा गया है।

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