Gujarat election 2017: बीजेपी से क्यों पिछड़ रही है कांग्रेस
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नई दिल्ली। कहते हैं कि जो जीता वही सिकंदर। गुजरात चुनाव में कोई भी बढ़त लेता नजर आए या फिर पिछड़ता नजर आए लेकिन नतीजे ही तय करेंगे कि किसकी रणनीति कारगर रही या किस पर जनता ने भरोसा जताया। कोई भी चुनाव हो उतार चढ़ाव होते रहते हैं और ऐसे ही उतार चढ़ाव गुजरात में भी देखने को मिल रहे हैं। प्रचार अभियान हो या फिर रणनीति, शुरूआत में कांग्रेस आगे निकलती दिख रही थी लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं।

मूडीज की रिपोर्ट से आर्थिक मोर्चे पर पार्टी का दावा और मजबूत
कांग्रेस ने एक एक कर तीन युवा नेताओं को अपने साथ लेकर चुनाव में खासी चर्चा पैदा कर थी और जिस तरह हार्दिक समर्थक बीजेपी से वापस लौट कर आए और दस लाख की रकम प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई उससे लग रहा था कि गुजरात का रण बीजेपी के लिए आसान नहीं रहा। लेकिन बीजेपी के तरकश में कितने तीर हैं, ये न तो कांग्रेस को मालूम और न ही राजनीतिक जानकारों को। एक एक कर बीजेपी उन मुद्दों को अपने पक्ष में करने में कामयाब होती नजर आ रही है जिनको लेकर पार्टी में चिंता थी और जिनसे कांग्रेस या उसके बाकी सहयोगी खुश नजर आ रहे थे। बीजेपी ने पहले जीएसटी के मुद्दे पर बड़ी राहत देकर व्यापारियों के गुस्से को ठंडा करने की कोशिश की और फिर मूडीज की रिपोर्ट से आर्थिक मोर्चे पर पार्टी का दावा और मजबूत हो गया।

पाटीदार समाज का गुस्सा
हम पहले ही कह चुके हैं कि बीजेपी की दो चिंता सबसे बड़ी हैं। एक तो पाटीदार समाज का गुस्सा और दूसरा व्यापारियों को जीएसटी और नोटबंदी से हुई परेशानी। पार्टी ने दोनों ही मसलों को तरीके से सुलझाया है और विरोधियों को ठंडा करने में कामयाबी पायी है। इधर जीएसटी की कवायद हुई तो दूसरी ओर हार्दिक पटेल को कमजोर करने की कवायद पहले से ही चल रही थी। टिकट बंटवारे के वक्त तक उनके कई करीबी सहयोगियों को तोड़ कर बीजेपी ने पाटीदार समाज के विरोध को कम करने में सफलता पा ली है। यही नहीं जिस तरह से हार्दिक पटेल का सीडी कांड वायरल हुआ उससे भी बीजेपी बढ़त लेती दिख रही है।

हार्दिक पटेल और कांग्रेस को झटका
पहले चरण के चुनाव के मतदान के होने के पहले बीजेपी के तरकश से और तीर निकलने के आसार हैं जिससे हार्दिक पटेल और कांग्रेस को झटका लग सकता है। एक एक कर हार्दिक पटेल के और भी सहयोगी उनसे किनारा कर सकते हैं। रही सही कसर कांग्रेस और हार्दिक पटेल की टिकट या आरक्षण को लेकर चल रही रस्साकशी से पूरी हो रही है। बीजेपी ने अपनी सारी सूचियों में पाटीदार समाज का पूरा ख्याल रखा है। इससे हार्दिक पटेल का दवाब कांग्रेस पर और बढ़ गया है। इसी चक्कर में अब तक न तो कांग्रेस अपने उम्मीदवारों को फाइनल कर पा रही है और न ही हार्दिक पटेल खुलकर कांग्रेस का साथ दे पा रहे हैं। इसमें जितनी देरी हो रही है, स्वाभाविक रूप से उसका फायदा बीजेपी को मिल रहा है।

उधेड़बुन में पार्टी का समय निकल रहा है
बीजेपी ने जिस तरह से एक एक कर उम्मीदवारों की सूचियां निकालीं और विरोध के वावजूद अपने कड़े फैसलों के तेवर दर्शाए उसकी तुलना में कांग्रेस के भीतर आत्मविश्वास नहीं देखने को मिल रहा। जैसे तैसे पहली सूची आई और दूसरी भी लेकिन दूसरी सूची में ही पहली सूची के कई नाम बदल गए। साफ जाहिर है कि पार्टी अपने स्तर पर कोई भी फैसला करने में सक्षम नहीं दिख रही। एक तरफ पार्टी के कार्यकर्ताओं को साथ रखने की चिंता है तो दूसरी तरफ हार्दिक पटेल को। इनके अलावा अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश को भी। बस इसी उधेड़बुन में पार्टी का समय निकल रहा है। इससे कांग्रेस शुरूआत में जो बढ़त लेती दिख रही थी, ठीक उलट अब बीजेपी उससे आगे निकलती दिख रही है।












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