जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति पर ठनी, कांग्रेस ने कहा-न्यायपालिका खतरे में, भाजपा- हमें कांग्रेस से सीखने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कोलेजियम की ओर से सिफारिश किए गए जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति ना होने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। कांग्रेस ने आज इस मसले पर प्रेस वार्ता कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि 'कानून कहता है कि जो सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम कहता है वही होगा, जबकि सरकार चाहती है कि अगर उसके मन मुताबिक नहीं हुआ, तो वो कोलेजियम की सिफारिशों को नज़रअंदाज करेगी, उसे मंजूरी नहीं देगी।' उन्होंने कहा कि 'पहली बार एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता महिला को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा रहा है, इसके लिये बधाई।' सिब्बल ने कहा कि 'हम लगातार कहते आये हैं कि न्यायपालिका खतरे में है।'

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उन्होंने कहा कि 'सवाल ये है कि एक स्वर में कौन बोलेगा, क्या न्यायपालिका बोलेगी कि 'बस अब बहुत हो चुका?' सिब्बल ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि PIL का दुरूपयोग होता है, हम सहमत हैं; कई बार इसलिए भी PIL दाखिल की जाती है ताकि किसी चीज को दबाया जा सके।' उन्होंने कहा कि 'ये सरकार जिस तरह से न्यायपालिका से व्यवहार कर रही है उसे सारा देश जानता है।' सिब्बल ने कहा कि - 'कोलेजियम ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसेफ योग्यता ज्यादा है। एससी वेबसाइट ने इसकी अधिसूचना जारी की थी। केंद्र सरकार उनकी उन्नति की स्थिति क्यों नहीं है?'

इसी मसले पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'कांग्रेस पार्टी के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है या न्यायपालिका की गरिमा के बारे में सवाल पूछने के लिए खड़े हों। कांग्रेस पार्टी का पूरा रिकॉर्ड उदाहरणों से भरा हुआ है कि कैसे भारत की न्यायपालिका से समझौता किया जाए।' बता दें कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी न्यायाधीश के एम जोसेफ की नियुक्ति को लेकर सवाल किए हैं।

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उन्होंने कहा है कि इंदु मल्होत्रा एक अच्छी वकील हैं और वह एक उम्दा न्यायाधीश साबित होंगी। मेरे पास सरकार के दृष्टिकोण पर बड़ा सवाल, ऐसी कोई बात नहीं है जिसके द्वारा उन्हें न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। सिंह ने कहा कि एक नियुक्ति करके और दूसरा नहीं कर के , सरकार ने न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप किया है। यह एक बहुत ही गंभीर मामला है।

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