लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस ने 15 लाख कार्यकर्ताओं से पूछा, क्या हो मोदी सरकार के खिलाफ नारा?
नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस पूरी ताकत से चुनावी रणनीति बना रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने आगामी चुनावों के लिए अपने 15 लाख कार्यकर्ताओं ने चुनावी नारों को लेकर सुझाव मांगे है। पार्टी इन नारों का इस्तेमाल केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करेंगे। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक एक कांग्रेसी नेता ने नाम ना बताने की शर्त पर इसकी जानकारी दी। इसे अमल में लाने कवायद 20 फरवरी से शुरू हो गई है।

मोदी सरकार के खिलाफ 15 लाख कांग्रेसी कार्यकर्ता देंगे नारा
पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि ये मेहनत कांग्रेस की नयी सोच है जो अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत को अपने साथ रखना चाहती है। ये एक बदलाव है। इससे पहले कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ रणनीतिकार और विज्ञापन कंपनिंया कांग्रेस के लिए चुनावी नारे गढ़ते थे। साल 2004 के चुनाव में 'कांग्रेस का हाथ ,आम आदमी के साथ' और साल 2009 में 'आम आदमी के बढ़ते कदम' ऐसे ही नारे थे। गौरतलब है कि नारे पार्टा के चुनाव प्रचार का एक अभिन्न अंग है क्योंकि ये ये पार्टियों को चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा देते हैं। साल 1971 में कांग्रेस के ‘गरीबो हटाओ' से लेकर साल 2014 में भाजपा के ‘अच्छे दिन आने वाले हैं' तक अलग-अलग पार्टियों ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए नवीन और आकर्षक लाइनों का इस्तेमाल किया है।

'6,800 नारे शार्टलिस्ट'
कांग्रेस पार्टी ने इस बार भी पवन खेड़ा की अगुवाई वाली कांग्रेस की
प्रचार समिति ने करीब एक दर्जन विज्ञापन एजेंसियों से मुलाकात की है। पार्टी ने फैसला किया है कि वो अपने जमीनी कार्यकर्ताओं से अपने पसंदीदा नारों के बारे में सुझाव मांगेगी। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया
कि 393 लोकसभा सीटों से 15 लाख कार्यकर्ताओं काचुनाव किया गया है। पार्टी ने इसके लिए देश भर के 246,000 बूथ को चुना है जो अपने फीडबैक देंगे। जानकारी के मुताबिक डेटा टीम ने कार्यकर्ताओं से मिले 6,800 नारों को शॉर्टलिस्ट किया है। कांग्रेस पदाधिकारियों के मुताबिक इनमें से 10 से 12 नारों पर प्रचार समति में चर्चा की जाएगी और 2019 चुनाव के लिए इन्हें चुना जाएगा। । कार्यकर्ताओं की तरफ से जो नारे प्रस्तावित किए गए वो ‘आप के साथ'और ‘युग की आवाज'जैसे नारों से शुरू होते हैं। कुछ नारे ‘न्यू विजन' और ‘नया युग' से भी शुरू होते हैं।

प्रचार समिति करेगी नारे फाइनल
पार्टी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये निश्चित नहीं है कि इनका पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन वे कम से कम ऐसे नारों का आधार बनाएंगे जो विज्ञापन एजेंसियों द्वारा बनाए जाएंगे। इन नारों से प्रचार समिति को आने वाले चुनाव में मतदाता की कल्पना को पकड़ सकते हैं। इस कवायद का एक फायदा ये भी होगा कि ये कार्यकर्ताओं और हेडक्वार्टर बीच संबंधों को बढ़ाएगा। कांग्रेस का डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण का कहना है कि परिणाम बहुत दिलचस्प हैं।प्रमुख तीन मुद्दे अर्थव्यवस्था, नौकरी और किसानों से जुड़े हैं। ये नतीजे जमीनी हकीकत और लोगों के सामने आने वाली समस्याओं को भी दर्शाते हैं।












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