नेहरू जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नहीं पहुंचे उपराष्ट्रपति और बीजेपी नेता, कांग्रेस ने जताई नाराजगी
नई दिल्ली, 14 नवंबर: पूरे देश में रविवार को भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती मनाई गई। जिसके तहत जगह-जगह पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। संसद में भी पारंपरिक तरीके से पंडित नेहरू को श्रद्धांजलि देने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। साथ ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) और केंद्रीय मंत्रियों की गैरमैजूदगी पर सवाल उठाए।

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राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा कि आज संसद के सेंट्रल हॉल में जिनकी तस्वीर लगी है, उनके लिए आयोजित पारंपरिक समारोह में असाधारण दृश्य देखने को मिला। उस कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर मौजूद नहीं थे। राज्यसभा के सभापति भी अनुपस्थित थे। इसके अलावा मोदी सरकार के एक भी मंत्री वहां पर नहीं पहुंचे। क्या इससे भी बुरा कुछ हो सकता है?
कांग्रेस की ओर से उठाए गए इस मुद्दे को टीएमसी ने भी पकड़ लिया। उन्होंने जयराम रमेश के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा कि मुझे कोई आश्चर्य नहीं है। मोदी सरकार संसद के साथ ही भारत के महान संस्थानों को एक साथ बर्बाद कर रही है।
सोनिया गांधी ने दी श्रद्धांजलि
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी रविवार सुबह ही शांतिवन पहुंची और उन्होंने से पंडित नेहरू को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके अलावा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्विटर के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को याद करते हुए, जिन्होंने हमेशा सत्य, एकता और शांति को हमेशा महत्व दिया।
14 तारीख को बनाया जाता है बाल दिवस
पंडित जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें प्यार से चाचा नेहरू के नाम से जाना जाता है, उन्हें बच्चों से काफी प्यार था। भारत 1956 से पहले हर साल 20 नवंबर को बाल दिवस मनाता था क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने 1954 में इस दिन को सार्वभौमिक बाल दिवस के रूप में घोषित किया था। 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद संसद में सर्वसम्मति से 14 नवंबर को उनकी जयंती के दिन को राष्ट्रीय बाल दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।












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