PNB SCAM: नीरव मोदी पर इंटरपोल का शिकंजा, जानिए घोटाले में अब तक क्या क्या हुआ?
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में 11400 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले के सामने आने के बाद इस घोटाले के पीछे मास्टरमाइंड नीरव मोदी के तमाम ठिकानों पर लगातार सरकारी एजेंसियों की छापेमारी जारी है। मुंबई, दिल्ली, सूरत स्थित नीरव मोदी के शोरूम, ऑफिस में गुरुवार को दिनभर छापेमारी चलती रही। आपको बता दें कि हाल ही में नीरव मोदी की एक तस्वीर सामने आई थी जिसमे वह दावोस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देखे गए थे। इस तस्वीर पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि छोटा मोदी को उन्होंने देश से भागने में मदद की है। कांग्रेस ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि उन्हें 2016 से ही इस घोटाले की जानकारी थी, बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और उन्हे देश से भागने दिया गया। वहीं कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तमाम आरोप बेबुनियाद हैं, उन्होंने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा चाहे वह किता ही बड़ा क्यों ना हो। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नीरव मोदी का पासपोर्ट जब्त किया जाएगा।
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लुकआउट नोटिस जारी, 5100 करोड़ की ज्वेलरी सीज
पीएनबी घोटाले के सामने आने बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ जांच शुरु कर दी थी, उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया। बैंक की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 31 जनवरी को नीरव मोदी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली है। उनके 17 ठिकानों पर गुरुवार को ईडी ने छापेमारी करके 5100 रुपए की ज्वेलरी और गोल्ड को सीज किया है। इसके साथ ही इंटरपोल को अलर्ट कर दिया गया हहै। इससे पहले पिछले महीने नीरव मोदी पर आरोप लगा था कि उन्होंने पीएनबी को 280 करोड़ रुपए की चपत लगाई है, जिसके बाद उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। लेकिन पीएनबी की ओर से अब इस चपत को 11400 करोड़ रुपए का बताया गया है।

फर्जी तरीके से मिली गारंटी, परिवार देश से बाहर
पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया है कि मुंबई स्थित उनकी ब्रांच के एक अधिकारी ने नीरव मोदी की इस धोखाधड़ी में मदद की, जिसकी वजह से उन्हे बिना गारंटी के क्रेडिट मिलता रहा, जोकि नियमों के खिलाफ है। करदाताओं के पैसों को गलत तरीके से विदेश भेजा गया। जानकारी के अनुसार नीरव मोदी, उसकी पत्नी, भाई निशाल और चाचा मेहुल चोकसी एक साथ मिलकर बैंक के अधिकारियों के साथ काम करते थे, जिसके कि उन्हें लेटर ऑफ अंडरटेकिंग हासिल हो सके। इस एलओयू को विदेश में कैश कराया जाता था। ये चारो ही इस महीने की शुरुआत में देश से बाहर जा चुके हैं।

क्या है लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग
आपको बता दें कि लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग बैंक की ओर से जारी किया जाता है, जिसे दूसरे बैंक से कैश कराया जा सकता है। सीबीआई को इस बात की जानकारी दी गई कि इस तरह के 8 एलओयू जारी किए गए, लेकिन इसकी जानकारी बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब नीरव मोदी की कंपनी ने एक बार फिर से लोन की मांग की। बैंक के जो अधिकारी पहले उसकी मदद करते थे वो रिटायर हो चुके थे, ऐसे में जब बैंक ने इसकी गारंटी मांगी तो तो कंपनी की ओर से कहा गया कि यह पहले से ही बैंक को मुहैया कराया जा चुका है। जिसके बाद बैंक ने उसे तलाशना शुरू किया तो इस बात की जानकारी मिली कि बैंक की ओर से फर्जी एलओयू जारी किए गए।

पीएम के साथ फोटो पर विवाद
इस घोटाले के सामने आने के बाद कांग्रेस और तमाम विपक्षी दल लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि आखिर कैसे नीरव मोदी पीएम मोदी की विदेश यात्रा का हिस्सा बना और वह दावोस में पीएम के बिजनेस डेलिगेशन में शामिल हुआ। कांग्रेस के इस आरोप का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नीरव मोदी पीएम के डेलिगेशन का हिस्सा नहीं था, वह अपने खर्च पर अपने आप दावोस गया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आखिर कौन है जो नीरव मोदी को बचा रहा है, सरकार ने लोगों का पैसा लेकर नीरव को विदेश भागने में मदद की।

राहुल गांधी ने बोला हमला
राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने भी इस घोटाले के सामने आने के बाद विजय माल्या से नीरव मोदी की तुलना की। राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा कि देश को लूटने में सबसे आगे नीरव मोदी, नीरव मोदी को पीएम मोदी ने गले लगाया, उन्हें दावोस में नीरव मोदी के साथ देखा जा सकता है। विजय माल्या की ही तरह 12000 करोड़ रुपए की चोरी हो गई, लेकिन सरकार ने अपनी आंखे मूंदे रखी।












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