ब्रिटिश काल की भारतीय रेल को रफ्तार देंगी अमेरिकी, जर्मन कंपनियां
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे मंत्री सदानंद गौड़ा ने अपना पहला रेल बजट पेश कर दिया और इसी के साथ उन्होंने भारतीय रेलवे में एफडीआई के बारे में भी ऐलान कर दिया।
पिछले कई वर्षों से जो लोग भारतीय रेल को करीब से देखते आ रहे हैं, वह दबी जुबान से ही सही मगर अब इस बात को मानने लगे हैं कि अगर रेलवे में एफडीआई को मंजूरी नहीं दी गई तो फिर इसके बुरे दिन कभी खत्म नहीं हो सकते हैं।
रेलवे के मैनेजमेंट और इसे रफ्तार देने के लिए आज एफडीआई जरूरी है। भारतीय रेलवे करीब 26,000 करोड़ रुपए की कमी से जूझ रही है।
आज जब रेल बजट में एफडीआई के बारे में बात कर ही डाली गई है तो फिर यह जानना भी जरूरी है कि वह कौन-कौन सी
कंपनियां हैं, जो भारतीय रेलवे में ज्यादा से ज्यादा निवेश करने को बेताब हैं। हालांकि यह कंपनियां पहले से ही भारत में मौजूद हैं लेकिन एक तय सीमा के बाहर वह भारतीय रेल को रफ्तार नहीं दे सकती हैं।
भारत सरकार की ओर से वर्ष 2008 में आठ बिलियन डॉलर के कांट्रैक्ट के साथ इन कंपनियों के साथ करार करने की तैयारी की गई थी।

अगले पांच वर्षों में 10 बिलियन डॉलर का लक्ष्य
भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में भारतीय रेलवे में 10 बिलियन डॉलर के विदेशी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा हुआ है। बिजनेस टुडे की ओर से एक अधिकारी के हवाले से खबर छपी है कि भारत सरकार इस बात पर यकीन करती है कि अगर आगे बढ़ना है और तरक्की करनी है तो फिर कुछ अच्छे समझौते करने पड़ेंगे।

एक साथ ट्रेन और प्लेन बनाने वाली पहली कंपनी
कनाडा की बॉम्बबार्डियर दुनिया की पहली ऐसी कंपनी है जो प्लेन और ट्रेन दोनों का उत्पादन करती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कनाडा की इस कंपनी ने गुजरात की एक छोटी सी जगह साव्ली में अपना प्लांट लगाया हुआ है। भारत में लगे कंपनी के इस प्लांट में करीब 500 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। फिलहाल यह कंपनी दिल्ली मेट्रो के कोच तैयार करती है।

सिग्नलिंग सिस्टम पर जोर
जर्मनी की सीमेंस को भारतीय रेल के नेटवर्क और सिग्नलिंग सिस्टम को और बेहतर करने की तैयारी में यहां पर और ज्यादा इनवेस्ट करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही है। सीमेंस कंपनी से जुड़े सूत्रों की मानें तो कंपनी का मानना है कि भारत में काफी संभावनाएं हैं और वहां यहां पर एफडीआई को मिलने वाली मंजूरी की खबर का पिछले कुछ वर्षों से इंतजार कर रही है।

बनाएगी और ज्यादा रेल कोच और इंजन
अमेरिका की अग्रणी कंपनी जीई अगर भारतीय रेल का हिस्सा बनती है तो फिर देश में आधुनिक सुविधाओं वाले मॉर्डर्न कोच और इंजन तैयार हो सकेंगे। वैसे जीई के अलावा एक और कंपनी ईएमडी यानी इलेक्ट्रो मोटिव डीजल भी भारत में अपने पैर पसारने का इंतजार कर रही है।

सरकार दे सकती है मंजूरी
ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन और जापान की ओर से भी भारत में रेल नेटवर्क के सुधार और इन्हें अत्याधुनिक बनाने के लिए तकनीकी तौर पर मदद की पेशकश की गई। हो सकता है कि सरकार की ओर से इन देशों को मंजूरी दी जा सकती है।












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