टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों की गाइडलाइन की समीक्षा के लिए समिति का गठन
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों की गाइडलाइन की समीक्षा के लिए एक समिति का गठिन किया है। बता दें कि इससे पहले ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने कथित रूप से फर्जी टीआरपी घोटाले के बाद 15 अक्तूबर को न्यूज चैनलों की रेटिंग को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की थी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि काउंसिल सांख्यिकीय मजबूती में सुधार के लिए माप के वर्तमान मानकों की समीक्षा करने और उन्हें बेहतर बनाने के इरादे से ये किया जा रहा है। इस कवायद के चलते साप्ताहिक रेटिंग 12 सप्ताह तक स्थगित कर दी गई।

कैसे तय की जाती है TRP
टेलीविजन रेटिंग पॉइंट को टीआरपी कहा जाता है। इसके द्वारा अनुमान लगाया जाता है की एक न्यूज़ चैनल या किसी प्रोग्राम की कितनी प्रसिद्धि है और इसे कितने लोग देखते हैं। इससे लोगों की पसंद का पता चलता है। भारत में इंडियन टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट नामक एक एजेंसी है जो की टीआरपी का अनुमान लगाने का काम करती है| यह एजेंसी विभिन्न फ्रीक्वेंसी की जांच करके यह पता करते हैं की कौनसा चैनल किस समय पर ज्यादा देखा गया है | फिर ये एजेंसी इन कुछ हजार फ्रेक्वेंसीस का विवरण करके पूरे देश के प्रसिद्द धारावाहिकों का अनुमान लगाती है। जिस धारावाहिक की जितनी ज्यादा टीआरपी होती है उस चैनल को उतने ही ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं।
किसी चैनल की इनकम भी उसकी टीआरपी पर निर्भर करती है। टीआरपी को मापने के लिए कुछ निर्धारित जगहों पर 'पीपल मीटर' लगाया जाता है जो एक फ्रीक्वेंसी के ज़रिये ये पता लगाता है कि कहाँ, कौनसा सीरियल देखा जा रहा है और कितनी बार देखा जा रहा है। इस मीटर से टीवी से जुड़ी हर मिनट की जानकारी मॉनिटरिंग टीम के जरिये इंडियन टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट को भेजी जाती है। इस जानकारी के बाद ही मॉनिटरिंग टीम ये तय करती है कि किस चैनल और शो की टीआरपी सबसे ज्यादा है।












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