Cold Moon 2020 in India: आज और कल आकाश में दिखेगा आखिरी Full Moon,जानिए इसके बारे में सबकुछ

Check Dates, Timings of Last Full or Cold Moon in India: साल 2020 का आखिरी Full Moon आज और कल की रात नजर आएगा, जिसे लेकर दुनिया के लोग काफी उत्साहित हैं। 'क्रिसमस' के बाद आने वाले इस पूरे चांद को 'कोल्ड मून' कहा जा रहा है क्योंकि इस दौरान विश्व में लगभग सब जगहों पर ठंड बहुत पड़ती है। भारत में 'फूल मून' आज शाम 7:54 से शुरू होगा जो कि विश्न के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर दिखाई देगा। दक्षिण अमेरिका, उत्‍तरी अमेरिका और कनाडा जैसे पश्चिमी गोलार्ध के देशों में यह 29 दिसंबर की रात 10:29 बजे दिखाई देगा जबकि अंतरराष्‍ट्रीय समय (UTC) के अनुसार ये कल 3.39 बजे सुबह अपने चरम पर होगा।

साल 2020 का 13 वां Full Moon

साल 2020 का 13 वां Full Moon

मालूम हो कि ये इस साल का 13 वां 'फूलमून' है। अलग-अलग जगहों पर इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। उत्‍तरी अमेरिका में इसे Long Nights Moon भी कहते हैं तो वहीं यूरोप में इसे 'मून आफ्टर यूल ' कहते हैं, जबकि इंडिया में इसे 'पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है, जिसका धार्मिक महत्व है। आज 'मार्गशीर्ष पूर्णिमा' है,जो कि आज सुबह 07:54 बजे शुरू हो गई है और 30 दिसंबर को 08:57 बजे खत्म होगी।

'चांद ना तो छोटा होता है और ना ही बड़ा'

'चांद ना तो छोटा होता है और ना ही बड़ा'

दरअसल चांद ना तो छोटा होता है और ना ही बड़ा, बल्कि सूर्य के चारों ओर घूमने वाली पृथ्वी के वो चारों ओर घूमता है क्योंकि वो पृथ्वी का 'उपग्रह' है। उसे पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में करीब 30 दिन का समय लगता है। उसकी लोकेशन एक महीने में कई बार बदलती है इसलिए ही कभी हमें चांद पतला, मोटा या हसिया के आकार का नजर आता है, जिस दिन चांद पूरा गोल होता है उसे ही 'पूर्णमासी' या 'पूर्णिमा' या Full Moon कहा जाता है। आज चांद पूरा गोल और चमकदार नजर आएगा।

चांद पर पृथ्वी की तुलना में गुरुत्वाकर्षण कम है

चांद पर पृथ्वी की तुलना में गुरुत्वाकर्षण कम है

चंद्रमा से आसमान नीला नहीं बल्कि काला दिखायी देता है क्योंकि वहां प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं है। 2016 में तीन सुपरमून की घटना हुई थी, चांद की कक्षीय दूरी, पृथ्वी के व्यास का 30 गुना है इसीलिए आसमान में सूर्य और चंद्रमा का आकार हमेशा सामान नजर आता है।

पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है चांद

चंद्रमा एक उपग्रह है जो कि पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। विज्ञान के हिसाब से चांद पर पृथ्वी की तुलना में गुरुत्वाकर्षण कम है इसी कारण चंद्रमा पर पहुंचने पर इंसान का वजन कम हो जाता है। वजन में ये अंतर करीब 16.5 फीसदी तक होता है। यह सौर मंडल का 5वां सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है।

चांद को भगवान मानते हैं लोग, करते हैं पूजा

चांद को भगवान मानते हैं लोग, करते हैं पूजा

हिंदू धर्म में चांद को भगवान माना गया है, करवाचौथ, पूर्णिमा जैसे व्रत चंद्रमा को ही देखकर होते हैं तो वहीं इस्लाम में तो चांद के बिना कोई काम ही नहीं होता है। ईद-उल-फितर, रमजान, ईदुज्जुहा और मुहर्रम जैसे प्रमुख पर्व चांद देखकर ही फाइनल होते हैं। कहते हैं कि हजरत मुहम्मद साहब ने कहा था कि मुसलमान तीज-त्योहार चांद देखकर ही मनाए। इसलिए मुस्लिम बिरादरी समूचे विश्व में हिजरी कैलेंडर के मुताबिक पर्व मनाती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा

मार्गशीर्ष पूर्णिमा

वैसे पूरा भारत आज 'मार्गशीर्ष पूर्णिमा' मना रहा है तो वहीं कुछ लोग आज के दिन उपवास भी रखे हैं। कहते हैं कि 'पूर्णिमा' का व्रत जीवन के समस्त भोग, ऐश्वर्य, सुख, संपत्ति प्रदान करने में सहायक है। पूर्णिमा के उपवास से घर-परिवार में धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं। उत्तम वर की कामना से यह व्रत करने वाली युवतियों की मनोकामना पूरी होती है। यह व्रत जिस कामना से भी किया जाए वो जरूर पूरा होता है। जन्मकुंडली में चंद्र के बुरे प्रभाव इस व्रत से दूर होते हैं। चंद्र की पीड़ा दूर करने के लिए इस दिन चंद्र यंत्र भी स्थापित किया जाता है।

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