मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है जलवायु परिवर्तन, यह दुनिया भर में चुनौतीः वेंकैया नायडू

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को जलवायु परिवर्तन के खतरे को मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती है। उन्होंने अंधाधुंध औद्योगिक विकास के प्रति लापरवाही को रेखांकित करते हुए कहा कि औद्योगिक क्रांति ने पर्यावरण को बड़ी क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि हमने प्रकृति की रक्षा करने की जरूरत को नजरंदाज किया है और पर्यावरण में अरबों टन ग्रीनहाउस गैसों की निरंतर पंपिंग की है।

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उपराष्ट्रपति ने आगे कहा, हमने तथाकथित विकास और प्रकृति के प्रति लापरवाही के परिणामस्वरूप अब हमें मानवता के अस्तित्व की भारी चुनौती का सामना करना है। यह दुनिया भर में एक चुनौती है। इससे पहले, गुरूवार को उपराष्ट्रपति नायडू ने जल संरक्षण पर एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का आह्वान किया था और सभी नागरिकों से पानी की हर बूंद को बचाने के लिए जल योद्धा बनने का आग्रह किया था।

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उपराष्ट्रपति नायडू गुरूवार को चेन्नई में आयोजित मिशन पानी के जल प्रतिज्ञा दिवस कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बड़े जल संकट को रोकने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पृथ्वी पर उपलब्ध ताजा पानी के 3 फीसदी में से केवल 0.5 फीसदी पाने के लिए उपलब्ध है, जबकि भारत की आबादी विश्व की आबादी से 18 फीसदी अधिक है, लेकिन भारत में दुनिया के नवीकरणीय जल संसाधनों का केवल 4 फीसदी है।

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