हवाई किराए की मनमानी पर खुलासा! मंत्री ने बताया- कब लागू होती है ₹7,500 से ₹18,000 की 'सीक्रेट' प्राइस कैप
Airfare Cap: केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद में विमानन क्षेत्र की प्रगति, चुनौतियों और एयरलाइंस संकट के समय सरकार की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्यतः हवाई किराए को बाजार की मांग और आपूर्ति तय करती है, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार के पास किराए की सीमा निर्धारित करने का अधिकार है।
उन्होंने हालिया इंडिगो संकट, कोविड-19 महामारी, और अन्य विशेष अवसरों पर सरकार द्वारा किए गए हस्तक्षेपों का उल्लेख किया, जब यात्रियों को मनमानी कीमत वृद्धि से बचाने के लिए किराए पर रोक लगाई गई थी। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "हवाई चप्पल से हवाई जहाज" के नारे के अनुरूप, सरकार विमानन क्षेत्र को आम लोगों से जोड़कर इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

असाधारण हालात में किराए की सीमा तय करने का अधिकार
मंत्री नायडू ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास असाधारण हालात में हवाई किराए की सीमा निर्धारित करने का अधिकार है। उन्होंने कोविड-19, प्रयागराज महाकुंभ, पहलगाम हमले और हालिया इंडिगो संकट जैसे उदाहरण दिए, जब यात्रियों को मनमानी कीमतों से बचाने के लिए सरकार ने हस्तक्षेप किया। यह अधिकार सरकार को तब मिला जब मांग और आपूर्ति में अत्यधिक असंतुलन के कारण किराए में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना थी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संकट के समय भी हवाई यात्रा सुलभ रहे।
ये भी पढे़ं: कौन हैं वो 4 इंस्पेक्टर, जो बने 6000 से ज्यादा Indigo Flight कैंसिलेशन के जिम्मेदार? DGCA ने किया बर्खास्त
'हवाई चप्पल से हवाई जहाज' की भावना
नागर विमानन मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नारे 'हवाई चप्पल से हवाई जहाज' का हवाला दिया, यह दर्शाता है कि सरकार विमानन क्षेत्र को देश के आम लोगों से गहराई से जोड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इसे डिरेगुलेट किया गया है, ताकि ज्यादा कंपनियों की भागीदारी हो और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे। यह जन-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकसित हो, इसका लाभ समाज के हर वर्ग को मिले।
इंडिगो संकट और सरकार का हस्तक्षेप
हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस में क्षमता की कमी के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुईं, जिससे कई रूट प्रभावित हुए और किराए में भारी उछाल आने की संभावना थी। मंत्री ने बताया कि अगर सरकार तत्काल हस्तक्षेप नहीं करती, तो किराए बहुत बढ़ जाते। इसलिए, सरकार ने तत्काल आदेश जारी कर दूरी के आधार पर किराए की अधिकतम सीमा तय कर दी, जिससे यात्रियों को मनमानी कीमतों से बचाया जा सका और संकट को नियंत्रित किया गया।
ये भी पढ़ें: Captain John Illson कौन हैं, जो उजागर करेंगे Indigo Flight Crisis के पीछे छिपे राज?
किराया नियंत्रण की वर्तमान सीमाएं
सामान्य परिस्थितियों में, बाजार की शक्तियां ही किराया तय करती हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप का पूर्ण अधिकार है। मंत्रालय के 6 दिसंबर के आदेश के अनुसार, उड़ानों की दूरी के आधार पर किराए की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है: जैसे 500 किमी तक की उड़ानों के लिए अधिकतम ₹7,500 और 1,500 किमी से अधिक के लिए ₹18,000। यह ढांचा सुनिश्चित करता है कि आवश्यक होने पर यात्रियों को सुरक्षित और किफायती यात्रा विकल्प उपलब्ध हो सकें।












Click it and Unblock the Notifications