Citizenship Amendment Act: 31,313 लोगों को मिलेगा फायदा, IB ने बताया किस धर्म के कितने लोगों को मिली नागरिकता
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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल (कैब) अब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) में तब्दील हो चुका है। इस कानून के आने के बाद से 31,313 लोगों को फायदा पहुंचेगा। साल 2016 में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की तरफ से ऐसे आंकड़ें जारी किए गए थे जिनमें बताया गया था कि देश में किस धर्म के कितने अप्रवासी नागरिक हैं और इन्हें किस तरह से फायदा मिलेगा। वेबसाइट फर्स्टपोस्ट की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। पिछले ही हफ्ते यह कानून लोकसभा और राज्यसभा से पास हुआ और फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पर साइन करके इसे अपनी मंजूरी दी है।

साल 2016 में दिए थे आंकड़ें
आईबी की ओर से साल 2016 की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस समय देश में कुल 31,313 अप्रवासी नागरिक हैं। इनमें से 25,447 हिंदू, 5,807 सिख, 55 क्रिश्चियन, दो बौद्ध और दो पारसी हैं। इन सभी ने दावा किया था कि उन्हें धर्म के आधार पर उनके देशों में अत्याचार सहने को मजबूर होना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय नागरिकता की मांग की थी। इस कानून के लागू होने के बाद से इन 30,000 से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिलेगा। सरकार की तरफ से इस बात की जानकारी संसदीय समिति के साथ उस समय साझा की गई थी जब उस समय बिल पर सुनवाई चल रही थी।

साल 2016 में भी हुई थी कोशिश
संसदीय समिति की तरफ से पूछा गया था कि इस कानून से कितने लोगों को फायदा पहुंचेगा। तब आईबी की ओर से जवाब दिया गया था, 'हमारे रिकॉर्ड्स के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय के तहत आने वाले 31,313 लोग इस समय देश में हैं जिन्हें दीर्घकालिक वीजा दिया गया है।' आईबी ने उसी समय हर धर्म के अप्रवासियों का आंकड़ा दिया था और बताया था कि इन लोगों को ही इस कानून का फायदा सबसे पहले होगा। समिति को उस समय इसमें हुए बदलावों को देखने का जिम्मा सौंपा गया था। साल 2016 में पहली बार मोदी सरकार ने इस बिल को पास कराने की कोशिश की थी।

किस आधार पर मिल सकेगी नागरिकता
आईबी ने उस समय समिति को बताया था, 'किसी को भी इस श्रेणी के तहत भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई करने के लिए यह साबित करना होगा कि धर्म की वजह से उन पर हुए जुल्मों की वजह से वे भारत आने को मजबूर हुए हैं।' आईबी ने कहा था कि हर दावे को सख्ती से परखा जाएगा और तब ही नागरिकता दी जाएगी। कमेटी की तरफ से तब आईबी से सवाल किया गया था कि क्या सिर्फ 31,313 लोगों को ही इस कानून से फायदा होगा? आईबी ने जवाब दिया था, 'हां, क्योंकि सिर्फ इतने ही लोगों ने नागरिकता के लिए अप्लाई किया है।'

धोखाधड़ी करने वालों के लिए ट्रिब्यूनल
आईबी ने आगे कहा था, 'बहुत से लोग होंगे जो शायद देश में आए हैं और उन्होंने कई अलग-अलग तरहों से नागरिकता ले ली हैं। उनके पास शायद देश का पासपोर्ट और राशन कार्ड भी हो। हो सकता है उनके पास दूसरे डॉक्यूमेंट्स भी हों और हो सकता है कि इन लोगों ने खुद को वोटर्स लिस्ट में भी रजिस्टर करा लिया हो। ऐसे लोगों पर फैसला लेने के लिए ट्रिब्यूनल्स हैं और वह इस बात का पता लगा रही हैं कि इन लोगों ने किन धोखाधड़ी के जरिए नागरिकता हासिल की है। यह एक मुश्किल मुद्दा है।' आईबी ने कहा था कि यह बिल सिर्फ उन लोगों के लिए है जिन्होंने धर्म के आधार पर जुल्म सहने का दावा एप्लीकेशन में किया है। आईबी ने उस समय यह भी कहा था कि यह संख्या काफी छोटी है।












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