चिराग ने किया ऐसा चमत्कार कि बदल गई पासवान की विचारधारा

फिल्मी दुनिया में फेल रहे चिराग पासवान में राजनीति को सलीके से सीखा और सही मौके पर उसका इस्तेमाल भी जान गए। तभी तो जो रामविलास पासवान 2002 के गुजरात दंगों के नाम पर एनडीए का साथ छोड़ चुके थे, जो तब से लगातार अपने सेक्युलर क्रेडेंशियल्स की दुहाई देते रहे थे वहीं अब हाथ जोड़कर बीजेपी के साथ दुबारा जुड़ने की बात कर रहे हैं। जब इस बारे में चिराग पासवान से पूछा गया तो उन्होंने साफ कर दिया कि जिस मसले में कोर्ट और एसआईटी क्लीन चिट दे चुकी है तो हम कैसे विरोध कर सकते है।
चिराग का फेंका ये पासा राजनीति के जानकारों को गले नहीं उतर रहा है। सच कहते है कि राजनीति में कब किसकी ओर मुड़ जाए इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। लोजपा और भाजपा के बीच गठबंधन पर सवाल यहीं कि अब तक मोदी की खिलाफत करने वाले पासवान नमो-नोम क्यों करने लगे? इस सवाल का जवाब भी आईने की तरह साफ है। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान अपने बेटे चिराग के लिए जमुई की सीट चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस और आरजेडी ना तो उन्हें मनपसंद सीट देने को तैयार है और ना ही मनमुताबिक संख्या।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें पहले ही सीटों को लेकर अपनी स्थिति साफ कर चुकी हैं और आरजेडी जमुई सीट किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ने वाली। ऐसे में रामविलास पासवान के पास बीजेपी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। हलांकि खबरें ये भी आ रही है कि बीजेपी ने भी लोजपा के साथ इस मसले पर उदारता दिखाई है। माना जा रहा है कि बीजेपी की इसी उदारता का परिणाम है कि चिरागद टीवी कैमरों के सामने नमो राग का जाप कर रहे है, लेकिन अब तक गठबंधन के मुद्दे पर रामविलास पासवान ने कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में एक सवाल ये भी कि क्या पासवान ने भी अपनी राजनीतिक विरासत बेटे चिराग को सौंप दी है या फिर गठबंधन पर बाप-बेटे में मनमुटाव है।












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