चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से चाइनाटाउन को कोई मतलब नहीं
[विवेक शुक्ला] कोलकाता में चाइना टाउन है, पर इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर कोई उत्साह नहीं था। यहां पर सैकड़ों चीनी मूल के लोग रहते हैं। कोलकाता के चीनियों को जानने वाले पत्रकार जयदीर बसु कहते हैं कि ये पूरी तरह से व्यापारी हैं। इन्हें सिर्फ धंधे से मतलब है, बिजनस बढ़े बस, फिर चाहे राष्ट्रपति आयें चाहे प्रधानमंत्री, इनसे कोई मतलब नहीं।

यहां पर रहने वाले चीनियों के बारे में कहा जाता है कि यह धंधें में गुजरातियों, मारवाडिय़ों और खत्रियों से दो कदम आगे ही होंगे। जनसत्ता, कोलकाता के संपादक रहे है शंभूनाथ शुक्ल बताते हैं कि इसकी दो अहम वजहें हैं। एक तो इनके समाज में हिप्पोक्रेसी नहीं है। दूसरे चीनी निर्भीक और अपने हक के लिए मरने मारने वाला होता है।
चाइना टाउन से जुड़ी रोचक बातें
- कोलकाता में शाम को चाइना टाउन के सभी होटल खुल जाते हैं। भीड़ इतनी ज्यादा कि लाइन लगती है।
- चाइना टाउन में वीकेंड में बम्पर भीड़ रहती है। संभव है कि वीकेंड में आपका नंबर पूरे घंटे भर बाद आए।
- चाइनाटाउन की चाइनीज वेज और नान वेज डिशेज, एक से एक लजीज होती हैं।
- आप बेफिक्र होकर इनके यहां सपरिवार खाना खाने जा सकते हैं।
- यहां कोई शराब मांगे तो वह भी वे तत्काल परोस देंगे वो भी पूरी बोतल।
- शराब परोसने का काम उनके घर की महिलाएं करती हैं पर मजाल है कि कोई उनके यहां अपनी दादागिरी दिखा सके।
- कोलकाता के चीनी समाज एक खुला हुआ समाज है जिसके यहां कोई धार्मिक जकड़बंदी न तो आज है और न पहले थी।
इतिहास के पन्नों से
भारत में राज कर रहे बिटिशर्स ने चीनियों को अफीम खिला-खिलाकर गुलाम बना रखा था। चीन 1949 में पीपुल्स गणराज्य बना और आज वह भारत से हर मायने में इक्कीस है। वे कहते हैं कि चीनियों की भाषाएं भी कई हैं पर देखिए कि करीब डेढ़ अरब की आबादी वाले चीन में सरकारी भाषा और एलीट क्लास की तथा प्रचलन में आ रही भाषा चीनी ही है।
एक बार भारत में पैसा लगाने से उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया था क्योंकि भारत के विदेश मंत्रालय ने उनके ड्राफ्ट में अंग्रेजी की कई कमियां निकाल दी थीं। चीन ने कहा था कि आप लोग अपनी अंग्रेजी सुधारते रहो व्यापार हम करते रहेंगे।












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