दक्षिणी चीन सागर पर चीन चाहता है अपना एकछत्र राज, विवादित सागर पर जबरन चला रहा है चीनी कानून
नई दिल्ली। एक तरफ जहां दुनिया कोरोनावायरस महामारी में उलझी हुई है, तो दूसरी तरफ चीन दक्षिणी चीन सागर पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। चीन के वुहान सिटी से निकलकर पूरी दुनिया पर कहर ढा रही नोवल कोरोना वायरस से पूरी दुनिया कराह रही है और चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रही हैं, लेकिन बेपरवाह दक्षिण चीन सागर को हड़पने की कोशिश में हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन दक्षिण चीन सागर में अपने अधिकार क्षेत्र से अधिक क्षेत्रों पर अपनी हुकूमत चलाने के मूड में है। क्योंकि चीनी तटरक्षक दल, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी व अन्य चीनी सरकारी एजेंसियां दक्षिण चीन सागर को हथियाने की फिराक में जुटी है। यही नहीं, विवादित सागर में चीनी कानून जबरन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में चीन की तरफ से वियतनाम के एक मछली पकड़ने के जहाज भी डूबो दिया गया था।

गौरतलब है चीन की ओर से समूचे दक्षिण चीन सागर और द्वीपों पर दावा किया जाता रहा है। गत 18 अप्रैल को बीजिंग ने क्षेत्र पर संप्रभुता के अपने दावे को मजबूत करने के लिए पेरासेल द्वीप समूह और स्प्रैटली द्वीपों पर अपना एकछत्र राज चलाते हुए दो जिले बना दिए हैं और उसके एक दिन बाद चीन ने 80 जियोग्राफिक और पानी के अंदर मौजूद फीचर्स के चीनी नाम प्रकाशित कर दिए हैं।

हाल में ही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो न चीन पर आरोप लगाया था कि Covid-19 के संकट से जूझ रहे अन्य देशों का फायदा बीजिंग ले रहा है और दूसरे देशों को डराने के लिए अपने सैन्य जहाजों को तैनात कर दिया है, ताकि वह अपतटीय गैस और तेल परियोजनाओं के विकास को पूरा कर सके। पोम्पेओ का बयान बीजिंग के दक्षिण चीन सागर में आगे बढ़ाने के प्रयासों को रेखांकित करता है, जहां इसके वियतनाम, फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ क्षेत्रीय संघर्ष हैं।

उल्लेखनीय है कि चीन के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी संदेह के घेरे में आ गया है। अमेरिका ने चीन पर नोवल कोरोना वायरस के बारे में जानकरी छुपाने और विश्व स्वास्थ्य संगठन को चीन का साथ देने का आरोप लगाते हुए अमेरिका की ओर विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली 400 मिलियिन डॉलर की सहायता को रोक दिया था।












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